Is Congress ready for a mid-term poll?

The shocker of assembly elections result also raised some serious questions over the survival of incumbent union government headed by Manmohan Singh. He is not very happy with the behaviour of Mamta Banerjee, Trinmool Congress (TMC) chief and Chief Minister of West Bengal. But, he and his party cannot afford to do away with TMC. Congress was expecting good performance in UP and the top leadership of the party was of the views that the party would be instrumental in forming a government in the most populous state and in return it will get extra number in centre.

दिग ‘पराजय’

क्या उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों के बाद गांधी परिवार उनसे इतना खफा हो जाएगा कि उन्हें किनारे कर दिया जाए? जो लोग दिग्‍विजय सिंह को अच्छे से जानते हैं वे हमेशा यह कहते हैं कि वे बड़े घाघ नेता हैं इसलिए उनके हर कदम का एक निश्‍चित राजनीतिक मतलब होता है. यहां से संकेत यह निकलता है कि दिग्‍विजय सिंह उत्तर प्रदेश के नतीजों से अनजान नहीं थे. यही वजह है कि राहुल गांधी के साथ उत्तर प्रदेश में लगे रहने के बावजूद दिग्‍विजय ने अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश में कांग्रेस की आपसी गुटबाजी में अपनी बिसात कुछ इस तरह बिछाई कि अब वहां एक ही गुट बचा है. वह है दिग्‍विजय सिंह का गुट. मतलब साफ है कि 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हर कदम के केंद्र में दिग्‍विजय रहने वाले हैं.

The great political dream

Although the general elections are 26 months away but the race for the prime job of the Indian democratic system has begun. The country is witnessing a neck to neck fight in BJP for becoming next Prime Minister Candidate. The tussle is growing by the passing of each day. It is believed that the Congress scion Rahul Gandhi is not in a haste to be PM. So, senior leaders of the oldest party of India are looking forward with some hope to get the top job. On the other hand, Bihar’s Chief Minister Nitish Kumar seems to be in the race of leading the country from New Delhi. Chief Minister of West Bengal Mamta Banerjee and Orissa’s Chief Minister Navin Patnaik are new entrant in the growing list of probable prime minister.

Tough task ahead for Rahul Gandhi Brand Managers

A couple of days ago, Rahul Gandhi got angry and tore of a piece of paper claiming that the Samajwadi Party poll promises are destined to be broken. He tried to give a message that the piece of paper was a part of SP manifesto. But some stupendous photo journalist exposed the Congress scion by revealing that the piece of paper was the list of Congress leaders, who were present on the stage of that particular election rally. The incident reflects that in the name of infusing new blood into Indian politics, Rahul Gandhi has learnt all political tantrums and gimmicks to earn electoral gains.

Battle for Uttar Pradesh

The road to rule the country from Delhi goes through Uttar Pradesh. It’s an old adage in Indian politics, but even today it has not lost its relevance. Every major or small political party is working hard to get electoral gains in the coming assembly elections of India’s most populous state. The stage is set for the most awaited political battle before the next general elections. According to senior political analysts, the UP election is going to have a major impact on national politics. It is believed that after UP elections major political shifts and alignments could be seen.

पंजाब चुनाव की पांच रोचक बातें

इस बार का पंजाब चुनाव कई मामलों में प्रदेश में अब तक हुए चुनावों से अलग है. पहली बार यहां की राजनीति में तीसरा कोण दिख रहा है. वहीं प्रमुख नेताओं के कोटे से टिकट पाने वालों में राहुल गांधी के कोटे से टिकट पाने वाले भी शामिल हो गए हैं. पहली बार बड़े रोचक अंदाज में राज्य के दो प्रमुख दलों में विज्ञापन युद्ध दिख रहा है. इसके लिए नामी कंपनियों का सहारा लिया गया है. वहीं चुनाव आयोग की कड़ाई कई नेताओं के सियासी स्वाद को कड़वा बना रही है. अंधविश्वास की छाया से भी इस बार का चुनाव बचा नहीं रह सका है. ऐसी ही पांच रोचक बातें ये हैं:

जमीन अधिग्रहण कानून पर लगा सियासी ग्रहण

विकास के बहाने किसानों से ली जाने वाली जमीन के बदले उन्हें उनका हक देने के मकसद से बनाया जा रहा नया जमीन अधिग्रहण कानून सियासी शह और मात का शिकार होता दिख रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस यह चाहती है कि यह कानून जल्द से जल्द बने वहीं दूसरे दलों के मन में यह भय सता रहा है कि यह कानून जल्दी लाने से कहीं कांग्रेस को चुनावी लाभ न मिल जाए। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी बार-बार यह दोहरा रहे हैं कि वे हर हाल में यह चाहते हैं कि नया जमीन अधिग्रहण विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पारित हो जाए और जल्द से जल्द यह कानून की शक्ल हासिल कर ले।

पदयात्रा से ‘पंचम तल’ की तैयारी

कांग्रेस के तमाम छोटे-बड़े नेता यह दावा करते हुए नहीं अघा रहे हैं कि अगले विधानसभा चुनाव में पश्‍चिम उत्तर प्रदेश में ‘राहुल का जादू’ ही चलेगा और लखनऊ के पंचम तल से एक बार फिर सूबे को चलाने का मौका देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को ही मिलेगा. यही रणनीतिकार पश्‍चिम उत्तर प्रदेश में जमीन के मुद्दे को सियासी एजेंडे में लाने की कवायद राहुल के जरिए कर रहे हैं. किसान संदेश यात्रा और किसान महापंचायत इसी कवायद के अहम हिस्से हैं. पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश में राहुल के ‘जादुई प्रभाव’ के दावे की हकीकत की पड़ताल के लिए उन तीन गांवों के माहौल को समझना जरूरी है जहां राहुल गांधी ने अपनी किसान संदेश यात्रा के दौरान रात गुजारी.