आने वाल कल सताने वाला है

मनमोहन सिंह सरकार बच तो गई है लेकिन हर तरफ यही सवाल पूछा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के दो धुर विरोधियों की बैसाखी पर टिकी यह सरकार आखिर कब तक चलेगी. संदेह के सवालों के बीच सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह और उनके प्रबंधक बड़े सुधारों की बात कर रहे हैं. सरकार और कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक तौर पर गठबंधन की मजबूती को लेकर चाहे जितने भी दावे किए जा रहे हों लेकिन खुद कांग्रेस के कई नेता निजी बातचीत में यह स्वीकार करते हैं कि स्थितियां उतनी आसान नहीं है जितनी बताई जा रही हैं.

फैसले का फलसफा

ममता का केंद्र सरकार से अलग होने का मतलब क्या है. इस सवाल का जवाब देने के लिए पश्चिम बंगाल की राजनीति को समझना बहुत जरूरी है. इस राज्य में 30 साल से अधिक समय तक वाम दलों की सरकार रही है. बड़ी मुश्किल से ममता ने इन्हें 2011 में राज्य की सत्ता से बेदखल किया. वे राज्य में भाजपा के साथ मिलकर भी चुनाव लड़ी हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी मिली कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद. प. बंगाल में कांग्रेस और भाजपा यानी दोनों राष्ट्रीय पार्टियों की हालत खराब है. दोनों सहयोगी की भूमिका में ही रह सकती हैं. इसलिए ममता जानती हैं कि राज्य में उनका असल मुकाबला वाम दलों से है.