‘गठबंधन टूटना बिहार के हित में नहीं’

राजनीति को जाति और संप्रदाय के दायरों से बाहर निकालने का सपना संजोने वालों को बड़ा झटका उस वक्त लगा जब बिहार में जदयू और भाजपा गठबंधन टूट गया। बदली परिस्थितियों में अब ऐसा लगने लगा है कि बिहार के ये दोनों प्रमुख दल एक बार फिर से उसी राजनीतिक दुष्चक्र में फंसने जा रहे हैं जिसमें लोगों को ध्रुवीकरण जाति और संप्रदाय के आधार पर सिर्फ चुनाव जीतने के लिए किया जाता है। बिहार विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी से हिमांशु शेखर की बातचीत के खास अंशः

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन क्यों अपना दूसरा कार्यकाल पूरा नहीं कर सकती

एम. करुणानिधी ने जैसे ही यह घोषणा की कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेगी वैसे ही हर तरफ केंद्र सरकार के असमय विदा होने को लेकर हर तरफ तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। एक तरफ डीएमके सांसद रात के करीब 11 बजे राष्टपति भवन जाकर समर्थन वापसी की चिट्ठी दे रहे थे तो दूसरी तरफ खबरिया चैनलों पर मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी के दूसरी पंक्ति के नेता यह कहकर लगातार भ्रम बढ़ा रहे थे कि बदली सियासी परिस्थितियों में केंद्र सरकार को समर्थन बरकरार रखने से संबंधित फैसला पार्टी और मुलायम सिंह यादव बैठक के जरिए करेंगे।

The great political dream

Although the general elections are 26 months away but the race for the prime job of the Indian democratic system has begun. The country is witnessing a neck to neck fight in BJP for becoming next Prime Minister Candidate. The tussle is growing by the passing of each day. It is believed that the Congress scion Rahul Gandhi is not in a haste to be PM. So, senior leaders of the oldest party of India are looking forward with some hope to get the top job. On the other hand, Bihar’s Chief Minister Nitish Kumar seems to be in the race of leading the country from New Delhi. Chief Minister of West Bengal Mamta Banerjee and Orissa’s Chief Minister Navin Patnaik are new entrant in the growing list of probable prime minister.

The curious case of Bihar

Both parties know very well that they need each other to gain power in Bihar and to show the strength at center. That’s why JDU chief Sharad Yadav is trying to work as a peacemaker and saying all is well. At the core of this development is the different identity of both parties and they want to maintain it on the best possible cost. Anti Modi tone of Nitish is required to allure Bihar’s 16.5 percent Muslim votes. In other hand, Brand Modi is the necessity of BJP to woo its core Hindu voters. Assembly election in Bihar is slated for this year and experts believe that cast and communal politics is going to play a major role in these polls.