मेधा के बहाने जनांदोलनों का सफर

यह किताब बताती है कि कैसे शांत और अंतर्मुखी लड़की के तौर पर जानी जाने वाली मेधा ने इतना बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया. यह पुस्तक उस पूरे सफर को बखूबी बयां करती है कि मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में पढ़ने वाली और जींस पहनने वाली मुंबईया लड़की किस तरह से आदिवासियों की नेता बनकर उभर जाती है और कैसे वह आदिवासियों के बीच जाकर उन्हीं की तरह न सिर्फ बोल-चाल करती है बल्‍कि उन्हीं के बीच उनकी ही जीवनशैली को भी अपनाती है. मणिपुरी नृत्य और एकल अभिनय करने वाली मेधा मराठी में कविताएं भी लिखती थीं और उनकी सामाजिक और राजनीतिक चेतना को एक नया आयाम देने में कहीं न कहीं उनके घर पर अक्सर आने-जाने वाले वरिष्ठ समाजवादी नेता मधु लिमये और जॉर्ज फर्नांडिस के असर की बात भी किताब करती है