Dilemma of the Dollar Dreams

A larger section of youths is of the view that they can’t get better opportunity here. So, they love to move to western countries. This phenomenon of ‘Brain Drain’ is taking place in almost every field. Engineers, Doctors and Management graduates are leading the chart. But, this approach of Indian Youth can’t be justified. In 1969 UNESCO defined brain drain as, ‘an abnormal form of scientific exchange between countries, characterised by a one- way flow in favour of the most highly developed countries’. Almost four decades later, the definition of brain drain has not changed at least in context of India.

Reality of Gulf dreams

Shabbir Ahmed is a resident of a small village of Sherghati, Bihar. Three years ago, he was leaving his native place and family for Dammam, one of the gulf countries. At that time, he was having a number of dreams in his eyes. He thought that after landing to Saudi Arabia, he will earn enough money to make his dreams come true and he would provide required facility to his family members. Once he lands to his dream land, he finds the situation quite different. The worst working conditions killed his very dream. He came back to India last February with a resolution; he will never go back to Gulf countries.

कब थमेगा छात्रों का पलायन

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने गए भारतीय छात्रों के खिलाफ वहां हो रही हिंसात्मक घटनाएं अभी भारत में चर्चा में है। इस मसले पर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। कुछ लोग यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर शिक्षा हासिल करने के लिए ऑस्ट्रेलिया जैसे देश की ओर रुख करने की जरूरत ही क्या है? दरअसल, इस सवाल को सिर्फ विदेश जाने वाले छात्रों के संदर्भ में ही देखना सही नहीं है। मन में बेहतर शिक्षा हासिल करने की आस लिए बड़ी संख्या में छात्र देश में भी एक राज्य से दूसरे राज्य का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। इस आंतरिक पलायन पर भी बातचीत होनी चाहिए।

कैसे थमेगा पलायन का सिलसिला

देश के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देसी-विदेशी मंचों पर भारत की आर्थिक विकास दर की चर्चा करते हुए नहीं अघाते। वे यह बताते हैं कि मंदी जैसे मुश्किल दर में भी उनकी सरकार ने देश की विकास दर को बनाए रखा और भारत विकसित होने की राह पर कदम दर कदम आगे बढ़ रहा है। पर जमीनी हालत तो कुछ और ही कहानी बयां करती है। अगर सचमुच देश में हर तरफ विकास की बयार बह रही होती तो क्या देश में हो रहे पलायन थमने का नाम नहीं लेती? आज भी बड़ी संख्या में लोग रोजी-रोटी की तलाश में देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से का रुख करने को मजबूर हैं।