महंगाईः सरकार और सच्चाई

मंडी और संगठित व असंगठित क्षेत्र की दुकानों के बीच भाव का अंतर महंगाई से संबंधित कई परतों को खोलता है. पहली बात तो यह समझ में आती है कि खास तौर पर खुदरा बाजार की कीमतों पर निगरानी रखने का कोई तंत्र नहीं है और इसका फायदा खुदरा कारोबारी उठा रहे हैं. सरकार भी यही कह रही है. लेकिन सरकार जो कह रही है वह पूरा सच नहीं है. सरकार यह नहीं बता रही कि इस तरह से ग्राहकों पर शोषण करने के मामले में संगठित क्षेत्र के खुदरा दुकान भी पीछे नहीं हैं. संगठित क्षेत्र के खुदरा दुकानों ने शुरुआती दिनों में पारंपरिक दुकानों की तुलना में कम कीमत पर भले ही फल और सब्‍जियों की बिक्री की हो लेकिन अब ये बराबर और कुछ मामलों में तो अधिक कीमतें भी वसूल रही हैं.

Pain of Price Rise

Amid the rising criticism of government policies over price rise, Union Agriculture Minister Sharad Pawar said that checking price rise is not his job. He said, “Rising prices is not a responsibility of Agriculture Ministry, as its prime job is to ensure the availability of food grains like wheat, rice, oil seeds and pulses. The decision of taking a particular vegetable crop is taken by the farmer at a local level and the hike in their prices is also a local matter and is not Union Agriculture Ministry’s responsibility.”

Benefitting oil companies by price rise

The oil companies will get maximum benefit from recent hike in fuel prices. According to an estimate, if a consumer spends one rupee on petrol in Delhi, the oil refining and marketing companies will earn 55 paise, The Central government will earn 29 paise and remaining 16 paise will go to state government exchequer. In the case of Diesel, out of every rupee spent by the consumer in Delhi, the oil refining and marketing companies will earn 72 paise, 12 paise will go to the centre and the balance 16 paise will go to the state. This is what government has done in the name of deregulating fuel prices.

The other side of picture

The Mainstream media is drawing a rosy picture for 2010. Most of the newspapers and news channels are saying that this is the decade of India and 2010 is just a beginning of this great decade. But is it true? In fact it’s not true. People of news media are aware of this but they are drawing a rosy picture because the character of that capital, which is running most of the media houses, is forcing them to do so. Media is saying, recession is over and good days are coming.

सरकार चाहती है मंहगाई बढ़े

बीते दिनों देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह बयान दे डाला कि अभी महंगाई और बढ़ेगी, इसका सामना करने के लिए देश के नागरिकों को तैयार रहना चाहिए। मनमोहन सिंह की पहचान एक बेहद प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री के तौर पर देश में ही नहीं है बल्कि विदेशों में भी है। उनके विपक्षी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि वे एक राजनेता की तुलना में बेहतर अर्थशास्त्री हैं। पर उन्होंने महंगाई को लेकर जो बयान दिया है उसकी उम्मीद तो अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह भी नहीं की जा सकती थी। प्रधानमंत्री के तौर पर तो ऐसा बयान देना और भी खतरनाक है।