Education is not for all

The second Millennium Development Goal (MDG) is, “to ensure that all boys and girls complete a full course of primary schooling.” This was supposed to be done by 2015. But, MDG report, 2010, released by UNDP, tells a different story. The report says, “Enrolment in primary education has continued to rise, reaching 89 per cent in the developing world. But, the pace of progress is insufficient to ensure that, by 2015, all girls and boys complete a full course of primary schooling.” It seems much more true to the context of India.

दाखिला बना कमाई का जरिया

देश के ज्यादातर हिस्सों में नर्सरी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अपने बच्चे की दाखिला के लिए अभिभावक स्कूल-दर-स्कूल भटक रहे हैं। अभिभावक हर हाल में अपने बच्चों को किसी न किसी अच्छे स्कूल में देखना चाहते हैं। यही वजह है कि वे अपने बच्चों के दाखिले के लिए कई-कई स्कूलों में आवेदन कर रहे हैं। अभिभावकों की इसी मजबूरी का फायदा उठाने के लिए निजी स्कूलों ने कई रास्ते ईजाद कर लिए हैं। इन्हीं में एक है दाखिले के लिए प्रोस्पेक्टस बेचकर कमाई करना।

कब थमेगा छात्रों का पलायन

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने गए भारतीय छात्रों के खिलाफ वहां हो रही हिंसात्मक घटनाएं अभी भारत में चर्चा में है। इस मसले पर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। कुछ लोग यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर शिक्षा हासिल करने के लिए ऑस्ट्रेलिया जैसे देश की ओर रुख करने की जरूरत ही क्या है? दरअसल, इस सवाल को सिर्फ विदेश जाने वाले छात्रों के संदर्भ में ही देखना सही नहीं है। मन में बेहतर शिक्षा हासिल करने की आस लिए बड़ी संख्या में छात्र देश में भी एक राज्य से दूसरे राज्य का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। इस आंतरिक पलायन पर भी बातचीत होनी चाहिए।

शिक्षक के बिना शिक्षा कैसे

वैसे तो देश की शिक्षा व्यवस्था कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही है लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या है शिक्षकों की कमी। इस समस्या से कम से कम सरकारी क्षेत्र के हर तरह के शिक्षण संस्थान दो-चार हो रहे हैं। देश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत भी कमोबेश ऐसी ही है। उच्च शिक्षण संस्थानों के सामने अभी सबसे बड़ी समस्या पढ़ाने वालों की कमी है। इस बात की पुष्टि जीके चड्डा पे रिव्यू कमेटी की रपट भी करती है।
इस रपट में 47 विश्वविद्यालय में किए गए अध्ययन के मुताबिक हर विश्वविद्यालय में 45 फीसद से लेकर 52 फीसद तक शिक्षकों के पद खाली हैं।

स्कूलों में भी भेदभाव के शिकार हैं दलित बच्चे

यूनिसेफ के सहयोग से दलित आर्थिक आंदोलन और नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स ने मिलकर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन स्कूलों में दलित बच्चों की स्थिति का जायजा लेने के मकसद से किया गया। इसके नतीजे बेहद चैंकाने वाले हैं। इस रपट में जिन-जिन राज्यों का अध्ययन किया गया उन सब राज्यों के स्कूली बच्चों के साथ स्कूल में भेदभाव बस इसलिए किया गया क्योंकि वे दलित थे। इस रपट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भेदभाव की वजह से बड़ी संख्या में दलित बच्चे अपने आगे की पढ़ाई बरकरार नहीं रख पाते।

Why We Need Examination Reforms?

The examination system of India has remained unchanged from so many years. That’s why most of Newspapers and Magazines publish articles on this topic during examination session. In this system of India, ability of a student is decided by an exam. In this system there is no place for performance of a student in full academic session. Scoring more and more marks in exams has become the only aim of a student. Impact of this stressful examination system is immense. Those who are in favour of this system should think about those bad impacts. First of all, if this system is good then all those who secure good marks in these must be brilliant and successful in life but reality is different.