बोफोर्स पर एक हैं भाजपा-कांग्रेस

बहुत कम लोगों को पता है कि लिंडस्टोर्म ने जो बात अपने नए साक्षात्कार में कही हैं, वही बातें उन्होंने देश के रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिस को 2004 के फरवरी में ही पत्र लिखकर बताई थीं. इसके बावजूद उस समय केंद्र की सत्ता पर काबिज अटल बिहारी वाजपेयी की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने लिंडस्टोर्म की बातों को आधार बनाकर कोई कार्रवाई नहीं की. यह घटना बताती है कि ‌आज बोफोर्स मामले में कांग्रेस को पटखनी देने की कोशिश कर रही भाजपा ने भी उस वक्त इस मामले में कुछ नहीं किया था जब सत्ता उसके हाथ में थी.

Is Congress ready for a mid-term poll?

The shocker of assembly elections result also raised some serious questions over the survival of incumbent union government headed by Manmohan Singh. He is not very happy with the behaviour of Mamta Banerjee, Trinmool Congress (TMC) chief and Chief Minister of West Bengal. But, he and his party cannot afford to do away with TMC. Congress was expecting good performance in UP and the top leadership of the party was of the views that the party would be instrumental in forming a government in the most populous state and in return it will get extra number in centre.

दिग ‘पराजय’

क्या उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों के बाद गांधी परिवार उनसे इतना खफा हो जाएगा कि उन्हें किनारे कर दिया जाए? जो लोग दिग्‍विजय सिंह को अच्छे से जानते हैं वे हमेशा यह कहते हैं कि वे बड़े घाघ नेता हैं इसलिए उनके हर कदम का एक निश्‍चित राजनीतिक मतलब होता है. यहां से संकेत यह निकलता है कि दिग्‍विजय सिंह उत्तर प्रदेश के नतीजों से अनजान नहीं थे. यही वजह है कि राहुल गांधी के साथ उत्तर प्रदेश में लगे रहने के बावजूद दिग्‍विजय ने अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश में कांग्रेस की आपसी गुटबाजी में अपनी बिसात कुछ इस तरह बिछाई कि अब वहां एक ही गुट बचा है. वह है दिग्‍विजय सिंह का गुट. मतलब साफ है कि 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हर कदम के केंद्र में दिग्‍विजय रहने वाले हैं.

Tough task ahead for Rahul Gandhi Brand Managers

A couple of days ago, Rahul Gandhi got angry and tore of a piece of paper claiming that the Samajwadi Party poll promises are destined to be broken. He tried to give a message that the piece of paper was a part of SP manifesto. But some stupendous photo journalist exposed the Congress scion by revealing that the piece of paper was the list of Congress leaders, who were present on the stage of that particular election rally. The incident reflects that in the name of infusing new blood into Indian politics, Rahul Gandhi has learnt all political tantrums and gimmicks to earn electoral gains.

चार सियासी ध्रुव और उत्तर प्रदेश

सबसे अधिक आबादी वाले इस राज्य की राजनीति की एक खासियत यह भी है कि यहां के चारों सियासी पक्षों ने कभी न कभी अपने बूते पंचम तल से प्रदेश पर राज किया है. पिछले चुनाव में दस सीटें जीतने वाली अजित सिंह की राष्ट्रीय लोक दल को अपने साथ मिलाकर कांग्रेस ने राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबले को पांच ध्रुवीय और सूबे की राजनीति को और जटिल बनाने से बचा लिया. इस चार ध्रुवीय लड़ाई में आम मतदाता इस बात को लेकर भ्रमित है कि वह किसके साथ खड़ा हो. क्योंकि कई सीटों पर सबका पलड़ा एकसमान दिखता है और नीतियों के स्तर पर भी चारों मोटे तौर पर समान दिख रहे हैं.

‘कांग्रेस दोहरे चरित्र वाली पार्टी है’

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने हिमांशु शेखर को बताया कि कांग्रेस के साथ मिलीभगत के आरोप बेबुनियाद हैं. उन्होंने बताया, ‘यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है कि भाजपा और कांग्रेस में गुपचुप तरीके से कोई समझौता हो गया है। अगर ऐसा होता तो हम संसद से लेकर सड़क तक ये मामले इतनी मजबूती के साथ नहीं उठाते। हमारे पार्टी के नेता संसद में ये मामले उठा रहे हैं और कार्यकर्ता न सिर्फ दिल्ली में बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में महंगाई के मसले पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टी गृह मंत्री पी. चिदंबरम का इस्तीफा मांग रही है। अगर भाजपा और कांग्रेस मिली होती तो ये सब नहीं होता।’