मोबाइल टावर की आड़ में

बिहार के हर जिले में ऐसे हजारों लोग हैं, जो अच्छा-खासा पैसा देकर मोबाइल टावर अपनी जमीन पर लगवाने की जुगत में लगे हुए हैं। क्योंकि बेरोजगारी की मार झेल रहे लोगों को ये मोबाइल टावर आमदनी के बेहतर जरिया लगते हैं। मालूम हो कि जिसकी भी जमीन पर ये टावर लगाए जाते हैं उन्हें एक निश्चित किराया हर महीने संबंधित दूरसंचार कंपनी से मिलती है। दरअसल, पैसे लेकर मोबाइल टावर लगाने का बिहार में जोरों पर है। इस पूरी व्यवस्था के कई सतह है।

मगध में बदलाव की बयार

वैसे तो बिहार के कई जिले नक्सल समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन मगध क्षेत्र के जिलों में नक्सलियों का खासा दबदबा रहा है। मगध क्षेत्र के भी तीन जिलों गया, औरंगाबाद और जहानाबाद में नक्सल समस्या की वजह से विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित रहा है। नीतीश सरकार के चार साल पूरे होने वाले हैं तो इस बारे में दो तरह की राय आ रही है। प्रशासन का कहना है कि विकास की गाड़ी पटरी पर आ गई है लेकिन इस क्षेत्र में सरकारी परियोजनाओं को अंजाम देने वाले ठेकेदारों का कहना है कि स्थितियां बदली जरूर हैं लेकिन पूरी तरह नहीं।