सिर्फ मौलिक अधिकार बनाने से नहीं मिलेगी शिक्षा

आखिरकार प्रतिभा पाटिल के यहां से भी शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाए जाने को हरी झंडी मिल ही गई यानी उनके दस्तखत के बाद यह कानून बन गया। अब कानूनी तौर पर छह साल से लेकर चौदह साल की उम्र वाले बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना मौलिक अधिकार में शामिल हो गया। पर अहम सवाल बरकरार है कि क्या ऐसा हो जाने से सही मायने में इस आयु वर्ग के बच्चों तक शिक्षा पहुंच पाएगी? क्या हर तबके के बच्चों के ज्ञान का अंधियारा मिट पाएगा?