भ्रष्टाचार अपरंपार

रक्षा मंत्रालय पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों का दायरा अब हथियारों या अन्य उपकरणों की खरीदारी तक सीमित नहीं रहा. सेना से रिटायर होने वाले जवानों और अधिकारियों को रोजगार के वैकल्पिक साधन मुहैया करवाने के नाम पर भी रक्षा मंत्रालय की शह पर हर साल अरबों रुपये का हेरफेर किया जा रहा है. डीजीआर की पूरी व्यवस्था के मुट्ठी भर लोगों के हाथ का खिलौना बन जाने से कुछ लोगों के लिए सेना की नौकरी से कई गुना अच्छा इनका दूसरा करियर यानी डीजीआर की मदद से रोजगार करना बन गया है.