राजनीति के कालिदास

सवाल यह है कि 60 सालों में एक ही पार्टी के प्रधानमंत्री की राय बदलने का मतलब सिर्फ पार्टी के चरित्र का बदलना है? या फिर यह बदलाव या भटकाव विचारधारा का है? या फिर देश की सियासी संस्कृति इस कदर बदल गई है कि वह हर संवैधानिक संस्था को ही कठघरे में खड़ा करना चाहती है? मामला सिर्फ सीएजी पर हमले का नहीं है. जब चुनाव आयोग आचार संहिता की कड़ाई से पालन की कोशिश करता है तो सत्ता में रहने वाले उस पर हमले करने से भी बाज नहीं आते और कार्रवाई करने की चुनौती देते नजर आते हैं. और तो और देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में भी इसे अपने ढंग से चलाने की हठ के आगे सरकार जनभावनाओं और दूसरे दलों की बातों की अनदेखी करने से बाज नहीं आती.

गांधी विश्वविद्यालय में गबन!

राष्ट्रपिता के नाम पर महाराष्ट्र के वर्धा में 1997 में शुरू हुआ महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रशासन पर आर्थिक अनियमिताओं के आरोप सामने आए हैं. अनियमितताओं की बात भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में की है. पहले भी विश्वविद्यालय के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन और खास तौर पर कुलपति विभूति नारायण राय पर आर्थिक और प्रशासनिक अनियमितता के आरोप लगाते रहे हैं. सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में विभूति नारायण राय के कार्यकाल के शुरुआती दो साल का ऑडिट शामिल है. जिन दो सालों के खर्चों का लेखा-जोखा किया गया है उस अवधि में विश्वविद्यालय को कुल 70.55 करोड़ रुपये मिले थे.