अनवरत असंतोष की फैक्टरी

जब दिल्ली से सटे मानेसर की मारुति कंपनी से मजदूरों और प्रबंधन के लोगों के बीच हिंसात्मक झड़प और इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी की मौत की खबर आई तो देश के औद्योगिक क्षेत्र की कामकाजी परिस्थितियों से वाकिफ लोगों को बिल्कुल आश्चर्य नहीं हुआ. मुनाफा और उत्पादन बढ़ाने की होड़ में शामिल कंपनियां श्रम कानूनों की लगातार अनदेखी करते हुए मजदूरों को शोषण के नए अर्थों से वाकिफ कराके औद्योगिक हिंसा की पृष्ठभूमि तैयार कर रही हैं. जिन लोगों ने मारुति में पिछले साल के संघर्ष को करीब से देखा था और जो इसके बाद भी मारुति में काम करने वालों के संपर्क में थे उन्हें यह पता था कि कंपनी में असंतोष की चिंगारी कभी बुझी ही नहीं.