Education is not for all

The second Millennium Development Goal (MDG) is, “to ensure that all boys and girls complete a full course of primary schooling.” This was supposed to be done by 2015. But, MDG report, 2010, released by UNDP, tells a different story. The report says, “Enrolment in primary education has continued to rise, reaching 89 per cent in the developing world. But, the pace of progress is insufficient to ensure that, by 2015, all girls and boys complete a full course of primary schooling.” It seems much more true to the context of India.

सहायता राशि की सियासत

बीते दिनों ऑक्सफैम ने एक रपट जारी की। ऑक्सफैम कई वैसी संस्थाओं का समूह है जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए काम कर रहे हैं। ऑक्सफैम की इस रपट में यह चेतावनी दी गई है कि अगर गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन से लडऩे के लिए अतिरिक्त धन नहीं दिया गया तो इन देशों के 45 लाख बच्चे काल की गाल में समा जाएंगे। इस पर विश्व के नेताओं को चिंतित होना चाहिए और ऐसी स्थिति पैदा नहीं हो पाए इस दिशा में आवश्यक कदम उठाना चाहिए।

सिर्फ मौलिक अधिकार बनाने से नहीं मिलेगी शिक्षा

आखिरकार प्रतिभा पाटिल के यहां से भी शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाए जाने को हरी झंडी मिल ही गई यानी उनके दस्तखत के बाद यह कानून बन गया। अब कानूनी तौर पर छह साल से लेकर चौदह साल की उम्र वाले बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना मौलिक अधिकार में शामिल हो गया। पर अहम सवाल बरकरार है कि क्या ऐसा हो जाने से सही मायने में इस आयु वर्ग के बच्चों तक शिक्षा पहुंच पाएगी? क्या हर तबके के बच्चों के ज्ञान का अंधियारा मिट पाएगा?

स्कूलों में भी भेदभाव के शिकार हैं दलित बच्चे

यूनिसेफ के सहयोग से दलित आर्थिक आंदोलन और नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स ने मिलकर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन स्कूलों में दलित बच्चों की स्थिति का जायजा लेने के मकसद से किया गया। इसके नतीजे बेहद चैंकाने वाले हैं। इस रपट में जिन-जिन राज्यों का अध्ययन किया गया उन सब राज्यों के स्कूली बच्चों के साथ स्कूल में भेदभाव बस इसलिए किया गया क्योंकि वे दलित थे। इस रपट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भेदभाव की वजह से बड़ी संख्या में दलित बच्चे अपने आगे की पढ़ाई बरकरार नहीं रख पाते।