Pranayam to Politics

Few believe that Baba will earn electoral gains but many of them are apprehensive about Baba’s electoral performance. It’s evident that bollywood stars are masters in attracting masses but when it comes to converting them into votes, their impact disappears. However, Baba rejects this argument saying, please don’t compare me with them.

Criminal background leads to victory

The Indian political parties speak louder against the criminalization of the politics but most of them have a big difference in their speaking and doing. It has been proved once again during recent Rajya Sabha elections. All the candidates with pending criminal cases have won the election. The elections for 55 seats of the Rajya Sabha held in two phase on 14 th June and 17th June in 12 states.

यह लोकतंत्र है या राजतंत्र

इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि वाईएस राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक शून्य उभरा है। पर उनकी मौत के बाद जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह तेजी से बदली सियासत के कई चेहरे को सामने ला रही है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस बदलाव की जितनी चर्चा होनी चाहिए उतनी हो नहीं रही है। जिस तरह से राजशेखर रेड्डी के बेटे वाईएस जगनमोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर मुहिम चलाई जा रही है, उसे एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं कहा जा सकता है।

सवालों के घेरे में ईवीएम मशीन

पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता के शोर में कई अहम बातें दब कर रह गईं। ये ऐसी बातें हैं जिन पर एक लोकतांत्रिक समाज में बहस होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर उनकी जांच भी होनी चाहिए। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और आईआईटी स्नातक ओमेश सहगल ने इलैक्टोनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के प्रोग्रामिंग पर सवालिया निशान लगा दिया है। उनका दावा है कि देश में प्रयोग किए जा रहे ईवीएम में एक खास कोड डाल देने भर से किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में हर पांचवां वोट चला जाता है।

धन और बल से मुक्त हो चुनाव

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन यानी आम चुनाव की तैयारियों में तेजी आ गई है। इसके साथ ही एक बार फिर कई ओर से चुनाव सुधार की बात चलने लगी है। लोकतंत्र की सफलता में यह बात अहम भूमिका निभाती है कि वहां चुनाव किस तरह से संपन्न होते हैं। चुनावी व्यवस्था की क्षमता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक भी हो जाता है। क्योंकि आजादी के बाद जो व्यवस्था कायम हुई उसमें इस निर्वाचन व्यवस्था का भी अहम योगदान रहा।