Poverty reduction remains sluggish

The Millennium Development Goals (MDG) were set by United Nations (UN) and adopted by world leaders in the year 2000. These goals were to halve the proportion of poverty and hunger, to achieve universal primary education, to promote gender equality, to reduce child mortality, to improve maternal health, to combat HIV/AIDS, malaria and other diseases, to ensure environmental sustainability and to develop a global partnership for development. These goals were set to be achieved by 2015. There are just five years left and almost every country is finding it difficult to achieve the first goal.

Insufficient Growth in food production

The world population is growing rapidly but the same is not true with the global food production. According to a recent report of OECD FAO, the global agriculture output is likely to grow more slowly over the next decade than in the past 10 years. But, nevertheless it remains on track with previous estimates to meet the demand, which is likely to grow by 70 percent by 2050. The rise in demand and slow growth in production would result in price rise.

बेहतर जल प्रबंधन से सुलझेंगी कई समस्याएं

सूखे को लेकर देशभर में चिंता की लहर है। सूखे को लेकर नीतियों का निर्धारण करने वाले लंबे-चैड़े बयान जरूर दे रहे हैं लेकिन बुनियादी सवालों की चर्चा करने से हर कोई कतरा रहा है। आखिर क्यों नहीं सोचा जा रहा है कि यह समस्या क्यों पैदा हुई? इस बात पर क्यों नहीं विचार किया जा रहा है कि इस तरह की समस्या का सामना करने के लिए सही रणनीति क्या होनी चाहिए और इसके लिए क्या तैयारी होनी चाहिए? जल प्रबंधन के मसले पर कहीं से काई आवाज नहीं आ रही है।

भूख का नया चेहरा

जो भी यह सोच रहे थे कि 2008 के गुजरने के साथ ही खाद्यान्न संकट और भुखमरी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगी, वे गलत साबित हुए हैं। उन्हें गलत साबित किया है एफएओ की एक रपट ने। बीते दिनों इस संस्था ने अनाज संकट और इससे उपजी भुखमरी पर अपनी रपट जारी की। इस रपट के मुताबिक विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के कारण इस साल यानी 2009 में भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या सबसे अधिक हो जाएगी।