अभिव्यक्ति पर सियासी हमला

बीते हफ्ते आईबीएन लोकमत के मुंबई स्थिति दफ्तर पर शिव सैनिकों ने हमला कर दिया। वहां पुरुष पत्रकारों के साथ-साथ महिलाकर्मियों से भी शिव सेना के शोहदों ने बदसलूकी की। इसके अलावा कार्यालय के गैर पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया। हद तो यह है कि आईबीएन लोकमत के प्रबंध संपादक निखिल वागले पर भी शिव सैनिकों ने हाथ उठाए। ये बातें इस चैनल को चलाने वाले लोग नहीं कह रहे हैं बल्कि टेलीविजन के जरिए पूरे देश ने इसे देखा और अभी भी इस पूरी घटना की रिकार्डिंग इस चैनल के पास हैं।

अखबारी मिलावट के खिलाफ मुहिम

बीते आम चुनाव में जब कई अखबारों ने विज्ञापन को खबर के तौर पर परोसा तो उन अखबारों के प्रबंधन ने सोचा भी नहीं होगा कि उनके इस मिलावटी रवैये के खिलाफ एक मुहिम चल पड़ेगी। पर ऐसा हो गया है। इस मुहिम को नेतृत्व करने और गति देने का काम भी उसी शख्स ने किया है जिसके योगदान को हिंदी पत्रकारिता में बेहद अहम माना जाता है। जनसत्ता निकालकर हिंदी पत्रकारिता को एक नया तेवर देने का काम करने वाले प्रभाष जोशी खबरों और विज्ञापन के घालमेल के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं।