धुआं कम करने की दरकार

अनुपम मिश्र कहते हैं कि धरती पर देश बंटे हुए हैं। थोड़ा-बहुत विवाद भले ही हो लेकिन उनकी सीमाएं तय हैं। इसी तरह आकाश तक की सीमाएं हमने बनाई हैं लेकिन धुआं सीमा को नहीं मानता। किसी भी देश का धुआं दूसरे देश में और दूसरे प्रदेश में बराबर आएगा और जाएगा। इसलिए अनुपम मिश्र मानते हैं कि बात कुल मिलाकर धुआं कम करने की जरूरत है।

बिगड़ते पर्यावरण से बढ़ेगा पलायन

तेजी से बिगड़ता पर्यावरण पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। यह जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता ही है कि दुनिया के 192 देशों के बड़े नेता कोपेनहेगन में इस मसले पर बातचीत करने के लिए एकत्रित हुए हैं। दुनिया के कई वैज्ञानिकों ने प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला है कि आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन पलायन की एक बड़ी वजह बनने जा रहा है।

निजी वाहनों की मार

देश के हर हिस्से में निजी वाहनों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। इस संख्या के बढऩे के लिए काफी हद तक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की नाकामी भी जिम्मेवार है। इसके अलावा निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के लिए एक तबके की बढ़ी आमदनी और आसानी से कारों के लिए मिलने वाले कर्ज भी कम जिम्मेवार नहीं है। ऐसा लगता है कि कारों की सवारी करने वाले इस बात से बेखबर हैं कि निजी वाहनों की बढ़ती संख्या किस तरह की मुसीबतों को लेकर आ रही है। इस वजह से यातायात के क्षेत्र में एक खास तरह का असंतुलन स्पष्ट तौर पर दिख रहा है।