रक्षा सौदों के बाद अब शोध में भी सड़ांध

सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने कुछ दिनों पहले एक साक्षात्कार में यह स्वीकार किया कि उन्हें विदेशी कंपनी के साथ होने वाले एक रक्षा सौदे में रिश्वत की पेशकश की गई थी. सिंह के इस बयान के बाद एक बार फिर से हर तरफ यह चर्चा हो रही है कि किस तरह से रक्षा सौदों में दलाली बदस्तूर जारी है और ज्यादातर रक्षा सौदों को विदेशी कंपनियां अपने ढंग से प्रभावित करने का खेल अब भी खेल रही हैं. रक्षा सौदों में दलाली और तैयारी के मोर्चे पर सेना की बदहाली के बीच एक मामला ऐसा है जो इस ओर इशारा करता है कि विदेशी कंपनियां अपने पहुंच और पहचान का इस्तेमाल न सिर्फ रक्षा सौदों को हासिल करने के लिए कर रही हैं बल्कि वे भारत के रक्षा क्षेत्र के शोध और विकास की प्रक्रिया को भी बाधित करके स्वदेशी रक्षा उपकरण विकसित करने की योजना को पटरी से उतारने के खेल में भी शामिल हैं. ताकि उनके द्वारा बनाए जा रहे रक्षा उपकरणों के लिए भारत एक बड़ा बाजार बना रहे.

बेहतर जल प्रबंधन से सुलझेंगी कई समस्याएं

सूखे को लेकर देशभर में चिंता की लहर है। सूखे को लेकर नीतियों का निर्धारण करने वाले लंबे-चैड़े बयान जरूर दे रहे हैं लेकिन बुनियादी सवालों की चर्चा करने से हर कोई कतरा रहा है। आखिर क्यों नहीं सोचा जा रहा है कि यह समस्या क्यों पैदा हुई? इस बात पर क्यों नहीं विचार किया जा रहा है कि इस तरह की समस्या का सामना करने के लिए सही रणनीति क्या होनी चाहिए और इसके लिए क्या तैयारी होनी चाहिए? जल प्रबंधन के मसले पर कहीं से काई आवाज नहीं आ रही है।