धुआं कम करने की दरकार

अनुपम मिश्र कहते हैं कि धरती पर देश बंटे हुए हैं। थोड़ा-बहुत विवाद भले ही हो लेकिन उनकी सीमाएं तय हैं। इसी तरह आकाश तक की सीमाएं हमने बनाई हैं लेकिन धुआं सीमा को नहीं मानता। किसी भी देश का धुआं दूसरे देश में और दूसरे प्रदेश में बराबर आएगा और जाएगा। इसलिए अनुपम मिश्र मानते हैं कि बात कुल मिलाकर धुआं कम करने की जरूरत है।

बिगड़ते पर्यावरण से बढ़ेगा पलायन

तेजी से बिगड़ता पर्यावरण पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। यह जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता ही है कि दुनिया के 192 देशों के बड़े नेता कोपेनहेगन में इस मसले पर बातचीत करने के लिए एकत्रित हुए हैं। दुनिया के कई वैज्ञानिकों ने प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला है कि आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन पलायन की एक बड़ी वजह बनने जा रहा है।

सहायता राशि की सियासत

बीते दिनों ऑक्सफैम ने एक रपट जारी की। ऑक्सफैम कई वैसी संस्थाओं का समूह है जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए काम कर रहे हैं। ऑक्सफैम की इस रपट में यह चेतावनी दी गई है कि अगर गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन से लडऩे के लिए अतिरिक्त धन नहीं दिया गया तो इन देशों के 45 लाख बच्चे काल की गाल में समा जाएंगे। इस पर विश्व के नेताओं को चिंतित होना चाहिए और ऐसी स्थिति पैदा नहीं हो पाए इस दिशा में आवश्यक कदम उठाना चाहिए।