पेड न्यूजः सब दल एक समाना

2014 के लोकसभा चुनावों में पेड न्यूज की शिकायतों की अंतिम संख्या अभी चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर नहीं जाहिर की है लेकिन अनुमान है कि चुनावों के दौरान ऐसी शिकायतों की संख्या हजार से अधिक रही। चुनाव आयोग ने इस बारे में अंतिम आधिकारिक जानकारी चुनाव के आखिरी चरण के तकरीबन दस दिन पहले दी थी। इसके मुताबिक आयोग ने तब तक पेड न्यूज के 854 मामले दर्ज किए थे। इसमें सबसे अधिक 208 मामले आंध्र प्रदेश में दर्ज किए गए। वहीं महाराष्ट्र में ऐसे 118 मामले आयोग के सामने आए।

राजनीति के कालिदास

सवाल यह है कि 60 सालों में एक ही पार्टी के प्रधानमंत्री की राय बदलने का मतलब सिर्फ पार्टी के चरित्र का बदलना है? या फिर यह बदलाव या भटकाव विचारधारा का है? या फिर देश की सियासी संस्कृति इस कदर बदल गई है कि वह हर संवैधानिक संस्था को ही कठघरे में खड़ा करना चाहती है? मामला सिर्फ सीएजी पर हमले का नहीं है. जब चुनाव आयोग आचार संहिता की कड़ाई से पालन की कोशिश करता है तो सत्ता में रहने वाले उस पर हमले करने से भी बाज नहीं आते और कार्रवाई करने की चुनौती देते नजर आते हैं. और तो और देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में भी इसे अपने ढंग से चलाने की हठ के आगे सरकार जनभावनाओं और दूसरे दलों की बातों की अनदेखी करने से बाज नहीं आती.

सवालों के घेरे में ईवीएम मशीन

पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता के शोर में कई अहम बातें दब कर रह गईं। ये ऐसी बातें हैं जिन पर एक लोकतांत्रिक समाज में बहस होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर उनकी जांच भी होनी चाहिए। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और आईआईटी स्नातक ओमेश सहगल ने इलैक्टोनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के प्रोग्रामिंग पर सवालिया निशान लगा दिया है। उनका दावा है कि देश में प्रयोग किए जा रहे ईवीएम में एक खास कोड डाल देने भर से किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में हर पांचवां वोट चला जाता है।