अग्रतम, व्यग्रतम

लगातार मोदी ने ऐसी छवि गढ़ने की सफल कोशिश की है जिसमें हिंदुत्व और विकास साथ-साथ चले. आर्थिक तौर पर मजबूत गुजरात की छवि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी गढ़ी जो निवेशकों और काॅरपोरेट घरानों की पहली पसंद हो. काॅरपोरेट घराने मोदी की तारीफ करने लगे. इसी बीच 2007 में गुजरात विधानसभा चुनावों में मोदी ने एक बार फिर से गुजरात की सत्ता में वापसी करने में सफलता हासिल की. इसके बाद दबे स्वर में ही सही लेकिन भाजपा में यह चर्चा चलने लगी थी कि इस व्यक्ति में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने का माद्दा है. लेकिन उस वक्त मोदी ने ऐसी कोई व्यग्रता नहीं दिखाई और 2009 में आडवाणी ही भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे.

‘हम नरेंद्र मोदी को गुजरात से बाहर निकलने ही नहीं देंगे’

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा और मीडिया का एक वर्ग भले ही भावी प्रधानमंत्री के तौर पर पेश कर रहा हो लेकिन कभी उनके साथ रहने वाले नेता ही राज्य की राजनीति में तीसरा कोण जोड़ने की कोशिश करके उन्हें गुजरात की सत्ता से भी बेदखल करने की योजना पर काम कर रहे हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के समर्थन से इस अभियान की अगुवाई करने वाले महागुजरात जनता पार्टी के अध्यक्ष और मोदी सरकार में गृह मंत्री रहे गोर्धन जडाफिया, हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि मोदी के साथ तो संघ की गुजरात इकाई भी नहीं है.