आगे बढ़ाना होगा उनके काम को

प्रभाष जोशी चले गए। उनके जाने के बाद हर तरफ से यही आवाज आई कि उनका जाना एक युग का अंत हो जाना है। उनके जाने से जो शून्य उभरा है, उसे भरना असंभव सरीखा है। नामी पत्रकारों से लेकर नवोदित पत्रकारों और पत्रकारिता के छात्रों ने भी उन्हें अपने-अपने तरह से याद किया। अखबारों में चर्चा हुई। कुछ पत्रिकाओं ने प्रभाष जी पर विशेषांक निकालने की भी घोषणा कर दी है। ब्लाॅग जगत में प्रभाष जी के जाने पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। 6 नवंबर की सुबह प्रभाष जी के वसुंधरा वाले घर पर और फिर उसी दिन गांधी शांति प्रतिष्ठान में बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे। आने वाले लोगों में से ज्यादातर के मन में प्रभाष जी से जुड़ी कोई न कोई याद जरूर थी। लोगों ने प्रभाष जी की पत्रकारिता को लेकर जमकर बातें कीं।