क्या गडकरी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भाजपा की राह का रोड़ा बन गए हैं?

सरकार लगातार किसी न किसी विवाद में घिर रही है. लेकिन भाजपा ने कभी भी ऐसा माहौल नहीं बनाया जिससे यह लगे कि मनमोहन सिंह सरकार खतरे में है. जब-जब भ्रष्टाचार के मसले पर सरकार को घेरने की बारी आई तब-तब कोई न कोई ऐसी बात सामने आई जिससे भाजपा को रक्षात्मक रुख अख्तियार करना पड़ा. कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विपक्षी दल के रूप में भाजपा की नाकामी की प्रमुख वजहों में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के कई फैसले और उनके कारोबारी रिश्ते शामिल हैं. दबी जुबान में ही सही भाजपा के कुछ नेता भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं.

अप्रासंगिक आडवाणी!

भाजपा को गढ़ने में अब तक सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले लालकृष्‍ण आडवाणी आज भी भले ही पार्टी के सबसे बड़े नेता माने जाते हों लेकिन पिछले कुछ महीने की घटनाएं बता रही हैं कि भाजपा में उनकी चल नहीं रही. उनके साथ खड़ा होने का खामियाजा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज को भी उपेक्षा के तौर पर भुगतना पड़ रहा है. मुंबई कार्यकारिणी ने पार्टी के नए समीकरणों का स्पष्ट संकेत दे दिया था. यह बात साफ हो गई थी कि आडवाणी-सुषमा-जेटली की तिकड़ी टूट गई है और जेटली गडकरी के साथ खड़े हो गए हैं.