स्कूलों में भी भेदभाव के शिकार हैं दलित बच्चे

यूनिसेफ के सहयोग से दलित आर्थिक आंदोलन और नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स ने मिलकर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन स्कूलों में दलित बच्चों की स्थिति का जायजा लेने के मकसद से किया गया। इसके नतीजे बेहद चैंकाने वाले हैं। इस रपट में जिन-जिन राज्यों का अध्ययन किया गया उन सब राज्यों के स्कूली बच्चों के साथ स्कूल में भेदभाव बस इसलिए किया गया क्योंकि वे दलित थे। इस रपट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भेदभाव की वजह से बड़ी संख्या में दलित बच्चे अपने आगे की पढ़ाई बरकरार नहीं रख पाते।

रवांडा से भी बदतर हालत में है ‘महाशक्ति भारत’

भय और भूख भारत की नियति बन चुके हैं. विकास की चारमीनार पर चढ़ने का दावा करनेवाले भारत के प्रगति की भूख जितनी विकराल दिखाई देती है उससे अधिक विकराल है भारत में पेट की भूख. ग्लोबल हंगर इंडेक्स बार-बार यह बता रहा है कि भूख के मामले में भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान और नेपाल ही नहीं बल्कि रवांडा से भी बुरी हालत में है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स बता रहा है कि भोजन के मामले में भारत अफ्रीकी देशों के ही बराबर खड़ा है.

ये लोकसभा तो अपराधियों और धनपशुओं की है

मुख्यधारा की मीडिया और प्रमुख सियासी दलों की तरफ से यह बात प्रचारित की जा रही है कि इस बार के चुनावों में अपराधियों को मुंह की खानी पड़ी। जबकि तथ्य इससे काफी अलग है। नेशनल इलेक्शन वाच ने सांसदों के हलफनामों का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला है कि दुनिया के सबसे ज्यादा गरीबों को अपने पेट में छिपाये सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी पंचायत (लोकसभा) में इस बार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों की संख्या डेढ़ सौ है। 2004 के चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 128 सांसद चुने गए थे और इस बार यह संख्या 150 है। इस तरह से देखा जाए तो इस मामले में 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

अमीरों का लोकतंत्र

इस बार के आम चुनाव में कई करोड़पति लोग जनता की नुमाइंदगी करने के मकसद से मैदान में उतर रहे हैं। करोड़पति उम्मीदवारों के मामले कोई भी दल और कोई भी राज्य पीछे नहीं है। हालांकि, इस बार कई उम्मीदवार तो अरबपति भी हैं। चुनाव में एक रोचक और चिंताजनक बात यह दिख रही है कि कई नेताओं की संपत्ति 2004 के मुकाबले 2009 में काफी बढ़ गई है। वैसे इस मामले में भी कोई दल पीछे नहीं है। एक नेता की संपत्ति में तो तीन हजार फीसद की बढ़ोतरी हो गई है।

रक्षा खर्चों का सच

यूपीए सरकार की ओर से अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्रालय का काम संभाल रहे प्रणब मुखर्जी ने यह घोषणा किया कि सरकार ने रक्षा बजट में पैंतीस फीसद की बढ़ोतरी की है। मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में कहा कि इस साल रक्षा के मद में 1,41,703 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पिछले साल यह रकम एक लाख छप्पन हजार करोड़ थी। फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा बजट बढ़ाने का फैसला देश की मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए लिया गया है।

Why We Need Examination Reforms?

The examination system of India has remained unchanged from so many years. That’s why most of Newspapers and Magazines publish articles on this topic during examination session. In this system of India, ability of a student is decided by an exam. In this system there is no place for performance of a student in full academic session. Scoring more and more marks in exams has become the only aim of a student. Impact of this stressful examination system is immense. Those who are in favour of this system should think about those bad impacts. First of all, if this system is good then all those who secure good marks in these must be brilliant and successful in life but reality is different.