गोपाल कृष्‍णः सरोकारों के झंडाबरदार

नंदन नीलेकणी की अगुवाई में देश को हर नागरिक को विशेष पहचान अंक यानी यूआईडी देने की परियोजना की वैधता और सुरक्षा चिंताओं को तो स्‍थायी संसदीय समिति ने तो हाल में उठाया है और इसे खारिज करने की सिफारिश की है. लेकिन गोपाल कृष्‍ण इन बातों को पिछले पौने दो साल से उठा रहे हैं. आज संसदीय समिति जिस नतीजे पर पहुंची है उसे वहां तक पहुंचने में भी गोपाल कृष्‍ण ने समिति की काफी मदद की है. इस रिपोर्ट में उनका नाम भी दो बार आया है. यूआईडी परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा और लोगों की निजी जिंदगी की जासूसी का औजार मानने वाले गोपाल कृष्‍ण कहते हैं कि इसे पूरी तरह से बंद कराने के लिए वे लड़ाई लड़ते रहेंगे.

खेल को चाहिए नई नकेल

जनवरी 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में जो फेरबदल किया उसमें उस समय के खेल मंत्री एमएस गिल को सांख्यिकी एवं क्रियान्वयन मंत्रालय में भेज दिया गया और गृह राज्य मंत्री अजय माकन को खेल मंत्रालय में लाया गया। माकन के आते ही खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक लाने की कोशिश की और इसका पहला मसौदा फरवरी में जारी हुआ। जब यह विधेयक अगस्त में केंद्रीय कैबिनेट में पहुंचा इसे यह कहते हुए वापस लौटा दिया गया कि इसमें काफी सुधार करने की जरूरत है। विधेयक में खेल संगठनों को पारदर्शी बनाने के लिए इन्हें सूचना का अधिकार कानून के तहत लाने और इन संगठनों के पदाधिकारियों के लिए उम्र और पद पर बने रहने की समय सीमा निर्धारित करने की बात की गई थी। माकन एक बार फिर इसे कैबिनेट के समक्ष ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

कब्जे से महफूज नहीं कब्रिस्तान

बढ़ती मुस्‍लिम आबादी के बीच देश की राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ सालों में कब्रिस्तान कम पड़ते जा रहे हैं. राजधानी के कई कब्रिस्तानों पर अवैध कब्जा है और कई कब्रिस्तान तो लुप्त ही हो गए हैं. इन कब्रिस्तानों पर न सिर्फ लोग निजी तौर पर कब्जा जमा रहे हैं बल्‍कि कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा जमाने में सरकारी एजेंसियां भी पीछे नहीं हैं. हालांकि, राज्य और केंद्र की सरकार अल्पसंख्यकों की हिमायती होने का दंभ भरते हुए नहीं अघाती है. दिल्ली में कब्रिस्तानों पर सरकारी और निजी स्तर पर जमाए जा रहे कब्जे की पुष्‍टि दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारियों से भी होती है.

हक की हुंकार

झारखंड और पश्‍चिम बंगाल के कुछ जिलों में स्‍थापित दामोदर घाटी परियोजना में बनने वाली बिजली से दिल्ली के कई घरों का अंधियारा दूर होता है. अब तक सिर्फ इस परियोजना से बिजली ही दिल्ली तक पहुंचती थी. लेकिन अब इस परियोजना के विस्‍थापित भी दिल्ली पहुंचकर अपने हक की मांग कर रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी में धरना-प्रदर्शन का पर्याय बन चुके जंतर-मंतर पर इस परियोजना के सैंकड़ों विस्‍थापित 17 अक्टूबर से बैठे हुए हैं. इनमें से 11 लोग 20 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठ गए

‘जो भी देश तोड़ने की बात करेगा हम उस पर हमले करेंगे’

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर हमला करने वाले भगत सिंह क्रांति सेना के अध्यक्ष तेजिंदर पाल सिंह बग्गा हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि हमें भारतीय जनता युवा मोर्चा में वह नहीं करने दिया जा रहा था जो हम करना चाहते थे. तेजिंदर ने कहा, ‘जो लोग देश तोड़ने की बात करते हैं उनके खिलाफ ऐसा करने के लिए हमें मजबूर होना पड़ा है. ये ऐसे लोग हैं जो कश्मीर को भारत से अलग करने की बात तो करते ही हैं साथ ही आतंकवादी कसाब की फांसी का विरोध भी करते हैं. ये माओवादियों का पक्ष लेते हैं. प्रशांत भूषण बार-बार भारत विरोधी बयान दे रहे थे.’

अनुसंधान से हितसंधान

बीते कुछ साल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले देश के प्रमुख शोध संस्‍थान सीएसआईआर के कामकाज में अनियमितताओं का दबदबा बढ़ा है. इन अनियमितताओं को अपने साथ संस्‍थान में लाने वाले मौजूदा महानिदेशक समीर ब्रह्मचारी की नियुक्‍ति को लेकर हाल तक इस विभाग के मंत्री रहे कपिल सिब्बल पर भी सवाल उठ रहे हैं. संस्‍थान से जुड़े लोग इन अनियमितताओं के लिए मौजूदा महानिदेशक समीर ब्रह्मचारी को कसूरवार मानते हैं. ब्रह्मचारी पर नियमों की अनदेखी कर मनमर्जी से नियुक्‍ति करने और नियुक्‍ति में बंगाल के लोगों को खास प्राथमिकता देने जैसे कई आरोप लग रहे हैं.

अनरियल एस्टेट

रियल स्टेट सेक्टर की तस्वीर के तीन अहम हिस्से हैं. एक उपभोक्ता यानी आम आदमी, दूसरा सेवा प्रदाता यानी बिल्डर और तीसरा यह सेवा ठीक से चले, इसके लिए एक उचित व्यवस्था बनाने वाली सरकार. कायदे से व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि उपभोक्ता को उचित मूल्य पर अच्छी सेवा मिले. उसके साथ वह न हो जो चौहान, सिंह या जोशी के साथ हुआ. हाल ही में एक प्रमुख समाचार समूह द्वारा करवाए गए सर्वे में 97 फीसदी लोगों का मानना था कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता का अभाव है जिसके चलते बहुत-से सवालों का ठीक-ठीक जवाब ही नहीं मिल पाता. इसकी सबसे ज्यादा मार आम आदमी पर पड़ रही है. सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए अभी तक कोई नियामक इकाई नहीं बनाई गई है.

Struggling for survival

Despite tall claims about positive impact of globalization, India is still considered as a nation of farmers and about 70 percent of its population still relies on agriculture for livelihood. A section of economists says repeatedly that the contribution of this sector in GDP is coming down day by day. However, Congress led UPA government pretends to be concerned about the condition of farmers and agriculture but in terms of policy the government appears to be anti farmer.

Misery of missing children

Children are considered to be the future of nation but system is not appearing sensitive about them. That’s why the number of missing children is going up. However, policymakers love to claim that they will do the needful to check this problem. Minors are not secure even in the national capital but despite of that Delhi police seems to be reluctant to curb this. However, Delhi police claimed that they have redoubled their efforts in this regard after the High Court maintained that the disappearance of “children below 16 years of age should be taken seriously”.

Need to strengthen Global Partnership

The eighth and last Millennium Development Goal (MDG-8) is to develop a global partnership for development. Under this goal, it was decided in 2000 to address the special needs of the least developed countries, landlocked countries and small island developing states. A lot has been done in this direction since 2000 but a lot needs to be done to achieve this target by 2015. Even, UNDP’s MDG report, 2010 is not showing very encouraging picture of progress at this front. The main problem is most of the developed countries are unable to fulfill their commitments of providing financial assistance to less developed and under developed nations.