‘दस्तखत फर्जी हुए तो राज्यसभा से इस्तीफा दे दूंगा’

जब भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह अमेरिका में जाकर वहां की सरकार से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी वीजा नहीं देने की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे थे उसी वक्त भारतीय सांसदों का एक पत्र सामने आया. यह पत्र अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को भेजा गया था. लोकसभा और राज्यसभा के 65 सांसदों की ओर से भेजे गए इस पत्र मे अमेरिका से यह मांग की गई थी कि वे मोदी को अमेरिकी वीजा नहीं देने की नीति को बरकरार रखे. पत्र के सामने आने के बाद कई विवाद उभरे. ओबामा को पत्र लिखने की पहल करने वाले राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब से इन विवादों पर हिमांशु शेखर की बातचीत के खास अंशः

‘गठबंधन टूटना बिहार के हित में नहीं’

राजनीति को जाति और संप्रदाय के दायरों से बाहर निकालने का सपना संजोने वालों को बड़ा झटका उस वक्त लगा जब बिहार में जदयू और भाजपा गठबंधन टूट गया। बदली परिस्थितियों में अब ऐसा लगने लगा है कि बिहार के ये दोनों प्रमुख दल एक बार फिर से उसी राजनीतिक दुष्चक्र में फंसने जा रहे हैं जिसमें लोगों को ध्रुवीकरण जाति और संप्रदाय के आधार पर सिर्फ चुनाव जीतने के लिए किया जाता है। बिहार विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी से हिमांशु शेखर की बातचीत के खास अंशः

‘भाजपा में परिवारवाद नहीं कार्यकर्तावाद चलता है’

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की नई टीम पार्टी के बड़े नेताओं के सगे-संबंधियों को जगह देने की वजह से ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ का दावा करने वाली भाजपा पर परिवारवाद का शिकार होने का आरोप लग रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कहा जा रहा है कि राजवीर सिंह को इसलिए जगह दी गई क्योंकि कल्याण सिंह की पार्टी का भाजपा में विलय या यों कहें कि उनकी वापसी की शर्तों में से एक शर्त यह भी थी। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि सभी को योग्यता के आधार पर संगठन में जगह दी गई है

‘मोदी ईमानदार हैं तो लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं कर रहे’

दो बार भाजपा की सरकार में मुख्यमंत्री रहे केशुभाई पटेल अब अपनी अलग पार्टी गुजरात परिवर्तन पार्टी बनाकर राज्य की सत्ता से नरेंद्र मोदी को बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी पार्टी खास तौर पर उन सीटों पर अधिक जोर दे रही है जहां पटेल मतदाता हार-जीत तय कर सकते हैं. लेकिन सारे चुनाव सर्वेक्षणों और आम लोगों से हो रही बातचीत के आधार पर तो यही लग रहा है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर जीतने वाले हैं. भाजपा नेता कहते हैं कि केशुभाई अपनी पार्टी को तो जीता नहीं पाएंगे लेकिन कुछ सीटों पर भाजपा का खेल खराब कर देंगे. केशुभाई पटेल से हिमांशु शेखर की बातचीत के अंश.

‘संप्रग-2 आजाद भारत की सबसे नाकाम सरकार है’

यशवंत सिन्हा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं. राजनीति में आने के बाद वे देश के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी रहे हैं. पिछले कुछ समय से उन्होंने अपनी पहचान आर-पार की राजनीति करने वाले नेता की बनाई है. झारखंड के हजारीबाग से लोकसभा चुनाव जीत कर आने वाले यशवंत सिन्हा अच्छे वक्ता भी हैं. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में वे अपनी बात बेबाकी से रखते हैं. वे भाजपा के एक ऐसे नेता हैं जो सरकार पर हमला करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता. मनमोहन सिंह सरकार की नाकामी और इससे संबंधित अन्य मुद्दों पर यशवंत सिन्हा से हिमांशु शेखर की विस्तृत बातचीतः

‘हम नरेंद्र मोदी को गुजरात से बाहर निकलने ही नहीं देंगे’

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा और मीडिया का एक वर्ग भले ही भावी प्रधानमंत्री के तौर पर पेश कर रहा हो लेकिन कभी उनके साथ रहने वाले नेता ही राज्य की राजनीति में तीसरा कोण जोड़ने की कोशिश करके उन्हें गुजरात की सत्ता से भी बेदखल करने की योजना पर काम कर रहे हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के समर्थन से इस अभियान की अगुवाई करने वाले महागुजरात जनता पार्टी के अध्यक्ष और मोदी सरकार में गृह मंत्री रहे गोर्धन जडाफिया, हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि मोदी के साथ तो संघ की गुजरात इकाई भी नहीं है.

सामाजिक समता के बगैर आजादी का कोई मतलब नहीं

मध्य प्रदेश के मंदसौर से लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन की पहचान बगैर किसी शोर-शराबे के चुपचाप काम करने वाले युवा नेता की है. 39 साल की मीनाक्षी की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता तो नई नहीं है लेकिन बीते दिनों उन्होंने बतौर लेखिका दस्तक देने का काम अपनी दो खंडों की पुस्तक ‘1857: भारतीय परिप्रेक्ष्य’ के जरिए किया. इस किताब में 1857 की क्रांति और इससे जुड़े तथ्यों का विश्लेषण एक अलग दृष्‍टि से भारतीय परिप्रेक्ष्य में किया है. यह किताब इस बात को विस्तार से समझाती है कि कैसे 1857 की क्रांति ने भारत को राष्ट्र राज्य की अवधारणा के करीब लाने में अपनी भूमिका निभाई और देश के एक बड़े हिस्से को एक सूत्र में बांधा. किताब के बहाने इतिहास और वर्तमान के कुछ मुद्दों पर मीनाक्षी नटराजन से हिमांशु शेखर की बातचीत के खास अंशः

‘आंतरिक मतभेद का चुनावी तैयारियों से कोई लेना-देना नहीं’

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि आपसी बातचीत से पार्टी की आंतरिक समस्याओं को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. वे कहते हैं, ‘भारतीय जनता पार्टी कोई तानाशाही पार्टी तो है नहीं. और न ही यहां किसी एक परिवार के इशारे पर सब कुछ होता है. भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है. इसलिए कई मुद्दों पर पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद कभी-कभार दिख जाता है. लेकिन ये मतभेद ऐसे नहीं होते जिन्हें सुलझाया नहीं जा सकता. आप देखिएगा, पार्टी के नेता आपसी बातचीत के जरिए जल्द ही पार्टी की आंतरिक समस्याओं को सुलझा लेंगे.’

‘टीम अन्ना की टिप्पणी से मैं नाराज नहीं’

जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष शरद यादव, हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि कुछ दागी सांसदों की वजह से पूरी संसद के औचित्य पर सवाल उठाना लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है. ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ कहकर टीम अन्ना द्वारा प्रहार करने पर यादव कहते हैं, ‘उनके इस बयान को लेकर मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूं. हम लोग राजनीति में हैं तो इस तरह के हमले तो होते रहते हैं. इससे कहीं ज्यादा बड़े आरोप हम पर लोगों ने पहले भी मढ़े हैं. हां, उनकी यह बात सही नहीं है कि मैंने जो पहले कहा था उससे पीछे हट गया हूं. अभी लोकपाल आया कहां है कि पीछे हटने की बात वे कर रहे हैं.’

‘हम सियासत करते हैं सौदा नहीं’

पंजाब की बिगड़ती माली हालत के मसले पर राज्य की शिरोमणी अकाली दल और भाजपा की गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने के बाद अपना नया दल पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाकर राज्य विधानसभा चुनावों को त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील करने वाले मनप्रीत सिंह बादल से हिमांशु शेखर की बातचीत के खास अंशः पूरी दुनिया में बदलाव का माहौल है. अरब देशों से लेकर अमेरिका तक आंदोलन चल रहे हैं. भारत में भी अन्ना हजारे का आंदोलन काफी बड़ा हुआ. तो जब हर ओर बदलाव का माहौल है तो पंजाब भी इससे अलग नहीं है. मैं राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कई महीने से जाकर लोगों से मिल रहा हूं. सूबे के लोगों की आंखों में वही जज्बा दिख रहा है जो 1947 में यहां के बुजुर्गों की आंखों में था. उस वक्त देश को बनाने का जज्बा था और इस बार राज्य को बचाने का जज्बा है. इसलिए मैं कह सकता हूं कि पंजाब के इस विधानसभा चुनाव को बदलावों के लिए याद किया जाएगा.