विविधा - No Comments » - Posted on November, 30 at 5:33 am
भारत में हाटों की परंपरा नई नहीं है। लंबे समय से देश के विभिन्न भागों में हाट लगते रहे हैं। उस दौर को गुजरे ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब ग्रामीण भारत के लोग खरीदारी के लिए इसी पर आश्रित होते थे। आम तौर पर ‘हाट’ पंचायत या अंचल के स्तर पर सप्ताह में एक या दो दिन लगता रहा है। हाट के आस-पास के गांवों में रहने वाले लोगों द्वारा सप्ताह भर की खरीदारी तो यहां होती ही थी साथ में आपसी मेलजोल भी बढ़ता था। यह हाटों का ही असर है कि आज शहरों में भी हर मुहल्ले में खास दिन हाटनुमा बाजार लगता है।
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मीडिया - No Comments » - Posted on November, 26 at 8:38 am
बीते हफ्ते आईबीएन लोकमत के मुंबई स्थिति दफ्तर पर शिव सैनिकों ने हमला कर दिया। वहां पुरुष पत्रकारों के साथ-साथ महिलाकर्मियों से भी शिव सेना के शोहदों ने बदसलूकी की। इसके अलावा कार्यालय के गैर पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया। हद तो यह है कि आईबीएन लोकमत के प्रबंध संपादक निखिल वागले पर भी शिव सैनिकों ने हाथ उठाए। ये बातें इस चैनल को चलाने वाले लोग नहीं कह रहे हैं बल्कि टेलीविजन के जरिए पूरे देश ने इसे देखा और अभी भी इस पूरी घटना की रिकार्डिंग इस चैनल के पास हैं।
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मीडिया - 1 Comment » - Posted on November, 26 at 5:52 am
बीते साल 26 नवंबर को भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली मुंबई पर हुए आतंकी हमले का एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल पूरा होने के मौके को भुनाने के लिए मीडिया आतुर है। सभी चैनलों ने विशेष कार्यक्रम तैयार किए हैं। कई चैनल तो बाकायदा मोमबत्तियां जलवा रही हैं। चैनलों के रवैये को देखकर कहा जा सकता है वे इस मौके को कमाई के मौके में तब्दील करने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते हैं। दरअसल, पिछले साल जब हमला हुआ था, उस वक्त भी चैनलों का रवैया भी कुछ ऐसा ही था।
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राजनीति - 1 Comment » - Posted on November, 25 at 6:12 am
लिब्रहान आयोग की रपट अब सबके सामने आ गई है। यह रिपोर्ट दूसरी रपटों से बहुत अलग नहीं है। यह रिपोर्ट भी सिफारिशों से भरी पड़ी है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए इसमें 68 लोगों को जिम्मेवार माना गया है। कहा गया है कि यह विध्वंस सुनियोजित था। इस रिपोर्ट पर राजनीति इसके सामने आने से पहले से शुरू हो गई है। सियासत आने वाले दिनों में और गरम होगी।
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समाज - No Comments » - Posted on November, 19 at 5:29 am
कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले मैकेफी के नाम से वाकिफ होंगे। एंटी वायरस बनाने वाली कंपनियों में मैकेफी का बड़ा नाम है। यह कंपनी पिछले तीन साल से बढ़ते साइबर खतरे को लेकर रपट जारी कर रही है। इस साल भी इस कंपनी ने अपनी सालाना मैकेफी वर्चुअल क्रिमिनोलाजी रिपोर्ट जारी की है। इस रपट में यह बताया गया है कि दुनिया अब एक नए तरह के युद्ध की ओर बढ़ रही है। तकनीक के इस जमाने में अब लड़ाई गोली-बंदूक और मिसाइलों से नहीं बल्कि साइबर वल्र्ड में होगी।
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राजनीति - 1 Comment » - Posted on November, 16 at 6:15 am
रोजगार गारंटी जैसी किसी योजना का नामकरण गांधी के नाम से कर देने से संभव है कि कोई सियासी लाभ कांग्रेस को मिल जाए लेकिन इससे इस योजना का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए तो सरकारी स्तर पर जिस इच्छाशक्ति की जरूरत है, उसी का स्पष्ट अभाव दिखता है। इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं जिनसे यह पता चल रहा है कि इस योजना में भ्रष्टाचार का घुन लग चुका है और अफसरशाही ने तो जैसे इसे असफल बनाने की ही ठान ली है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत रोजी पाने वालों की अब तक की डगर काफी कठिन रही है।
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राजनीति - No Comments » - Posted on November, 12 at 5:50 am
मौजूदा सरकार एक और लोक लुभावन योजना लेकर आ सकती है। दूसरी बार सत्ता में आई यूपीए की यह सरकार भोजन का अधिकार कानून लाने की योजना बना रही है। हाल ही में इस सरकार ने शिक्षा का अधिकार को कानूनी जामा पहनाया है। इस सरकार में बैठे हुए लोगों को लगता है कि अगर वे भोजन के अधिकार कानून को लागू करने में कामयाब हो जाते हैं तो यह उनके खाते में जुड़ने वाली एक और अहम कामयाबी हो जाएगी।
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दुनियादारी - 4 Comments » - Posted on November, 11 at 5:56 am
याद आने लगा कि बीते 13 सितंबर को इसी जगह पर बैठकर प्रभाष जी से तकरीबन दो घंटे बातचीत हुई थी। आज उनका शरीर था लेकिन वे नहीं थे। वे खामोश थे। यह खामोशी टूटने वाली नहीं थी। 13 सितंबर की सारी बातें जेहन में आने लगीं। मुझे प्रभाष जी से मिलने आना था। अभय भाई ने कहा कि वे भी चलेंगे। हम जब पहुंचे तो प्रभाष जी कुमार गंधर्व को सुन रहे थे। राय साहब ने पैसे लेकर खबर छापने की प्रभाष जी की मुहिम पर उनसे बात करके कुछ लिखने को कहा था। प्रभाष जी ने कहा कि थोड़ी देर कुमार गंधर्व को सुन लें, इसके बाद बातचीत करेंगे। जब एक खत्म होता तो प्रभाष जी कहते बस एक और।
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राजनीति - No Comments » - Posted on November, 5 at 5:03 am
It seems that Indian media and Indian society is obsessed of politics. Media are full of political news and each and every one can easily see political debates in the society. Most of the news and debates are based on political drama. Media and Society are giving excessive importance to these dramatic political issues but they are ignoring some basic issues, which are more important. In fact, political obsession is limiting the scope of serious debates on very serious issues.
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