समाज - 2 Comments » - Posted on October, 9 at 5:26 am
सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने पर लगी पाबंदी के एक साल बीते 2 अक्टूबर को पूरे हुए। ऐसी हालत में यह जरूरी हो जाता है कि इस बात चर चर्चा की जाए कि इस एक साल में इस प्रतिबंध का क्या परिणाम हुआ। पिछले साल जब यह प्रतिबंध लागू हुआ था तो उस समय के स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणी रामदास की तरफ से काफी लंबे-चैड़े दावे किए गए थे। पर तथ्य उन दावों के खोखलेपन की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर लगा प्रतिबंध धुएं में उड़ गया।
Read More..>>
Posted in समाज | 2 Comments »
राजनीति - No Comments » - Posted on October, 8 at 4:58 am
अमित देशमुख ने कहा कि यह अस्वाभाविक नहीं है और कांग्रेस ने राज्य के 288 सीटों में से आठ सीटों के लिए ही नेता पुत्र या नेता पुत्रियों को उम्मीदवार बनाया है। उनके मुताबिक इसमें कोई बुराई नहीं है। वे कहते हैं कि राजनीति में सबसे बड़ी चीज जीतने की क्षमता है और इसी वजह से ऐसे लोगों को टिकट दिया जाता है। इन दोनों बातों पर चर्चा बेहद जरूरी है। क्योंकि उन्होंने जो दो बातें कही हैं, वे परिवारवाद की राजनीति की रक्षा करने की सियासत का हिस्सा है।
Read More..>>
Posted in राजनीति | No Comments »
मीडिया - 1 Comment » - Posted on October, 7 at 5:21 am
बड़े चैनलों के प्रमुख और बड़े अखबारों के संपादकों के मुंह से यह सुना जा सकता है कि आजकल जो नए लोग मीडिया में आ रहे हैं, वे अपेक्षा के मुताबिक नहीं हैं। उनका कहने का तात्पर्य यह होता है कि जो भी नए युवा मीडिया में आ रहे हैं, वे सक्षम नहीं है। मीडिया में शीर्ष पर बैठे हुए इन संपादकों की बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसे एक सामान्य प्रतिक्रिया मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। क्योंकि यह एक बेहद गंभीर बात है। गंभीर और अहम इसलिए भी है कि यह एक पूरी पीढ़ी की क्षमता पर सवालिया निशान लगाता है। इसलिए इसकी पड़ताल आवश्यक हो जाती है।
Read More..>>
Posted in मीडिया | 1 Comment »
पर्यावरण, समाज - 2 Comments » - Posted on October, 6 at 6:36 am
देश के हर हिस्से में निजी वाहनों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। इस संख्या के बढऩे के लिए काफी हद तक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की नाकामी भी जिम्मेवार है। इसके अलावा निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के लिए एक तबके की बढ़ी आमदनी और आसानी से कारों के लिए मिलने वाले कर्ज भी कम जिम्मेवार नहीं है। ऐसा लगता है कि कारों की सवारी करने वाले इस बात से बेखबर हैं कि निजी वाहनों की बढ़ती संख्या किस तरह की मुसीबतों को लेकर आ रही है। इस वजह से यातायात के क्षेत्र में एक खास तरह का असंतुलन स्पष्ट तौर पर दिख रहा है।
Read More..>>
Posted in पर्यावरण, समाज | 2 Comments »
मीडिया - 2 Comments » - Posted on October, 5 at 6:09 am
बीते आम चुनाव में जब कई अखबारों ने विज्ञापन को खबर के तौर पर परोसा तो उन अखबारों के प्रबंधन ने सोचा भी नहीं होगा कि उनके इस मिलावटी रवैये के खिलाफ एक मुहिम चल पड़ेगी। पर ऐसा हो गया है। इस मुहिम को नेतृत्व करने और गति देने का काम भी उसी शख्स ने किया है जिसके योगदान को हिंदी पत्रकारिता में बेहद अहम माना जाता है। जनसत्ता निकालकर हिंदी पत्रकारिता को एक नया तेवर देने का काम करने वाले प्रभाष जोशी खबरों और विज्ञापन के घालमेल के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं।
Read More..>>
Posted in मीडिया | 2 Comments »