दुनियादारी - No Comments » - Posted on August, 18 at 6:08 am
हर रोज तकरीबन साढ़े दस बजे उसकी आवाज आती है। अब तो उसकी पदचाप से ही पता चल जाता है कि वह आ रहा है। हर रोज वह सिर्फ एक ही शब्द बोलता है। वह शब्द है-कूड़ा। उसकी उम्र यही कोई बारह-तेरह साल होगी। सही उम्र उसे भी नहीं पता है। नाम पूछने पर उसने संजय बताया। उम्र पूछने पर वह पता नहीं सर कहता है। लेकिन उसे देखकर उसकी उम्र का आभास होता है। जब एक दिन मैंने उससे बातचीत की और नाम और उम्र के बाद जब मैंने उसके घर-बार के बारे में पूछा तो वह कूड़ा उठाकर चलता बना। बगैर कुछ बोले।
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आर्थिक, राजनीति, समाज - 1 Comment » - Posted on August, 17 at 5:50 am
जो भी यह सोच रहे थे कि 2008 के गुजरने के साथ ही खाद्यान्न संकट और भुखमरी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगी, वे गलत साबित हुए हैं। उन्हें गलत साबित किया है एफएओ की एक रपट ने। बीते दिनों इस संस्था ने अनाज संकट और इससे उपजी भुखमरी पर अपनी रपट जारी की। इस रपट के मुताबिक विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के कारण इस साल यानी 2009 में भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या सबसे अधिक हो जाएगी।
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मीडिया - 1 Comment » - Posted on August, 13 at 10:22 am
खबरिया चैनलों के पथभ्रष्ट होने का सारा दोष टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट यानी टीआरपी पर मढ़ा जाता है। इन चैनलों को चलाने वाले यह कहते हुए नहीं अघाते कि जिस कार्यक्रम को ज्यादा टीआरपी मिलती है, उसे ही वे दिखाएंगे। टीआरपी के ज़्यादा होने का सीधा-सा मतलब ज़्यादा दर्शक संख्या होने से लगाया जाता है। पर सही मायने में देखा जाए तो जिस टीआरपी के नाम पर जम कर गंध घोला जा रहा है, उसकी व्यवस्था में ही भयानक दोष है। टीआरपी तय करने वाली पूरी व्यवस्था बिल्कुल उसी तरह है, जिस तरह से दो लोगों की पसंद-नापसंद को एक बड़े तबके की पसंद-नापसंद बता दिया जाए।
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राजनीति, समाज - 1 Comment » - Posted on August, 12 at 7:19 am
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की एक रपट आई है। इसमें 2007-08 के दौरान देश भर में महिलाओं के खिलाफ अंजाम दिए गए आपराधिक घटनाओं का लेखा-जोखा है। यह रपट कई तरह के सवाल खडे क़रती है। इस रपट में यह बताया गया है कि देश की राजधानी यानि दिल्ली महिलाओं के सुरक्षा के लिहाज से सबसे बुरी हालत में है। 2007-08 में यहां महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया गया।
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