गुमशुदा बच्चों की सुध कौन लेगा

समाज - 1 Comment » - Posted on July, 29 at 8:22 am

चालू संसद सत्र में कानपुर से गायब हो रहे बच्चों का मामला उठा। यह बताया गया कि पिछले कुछ महीनों में वहां से दर्जनों बच्चे गायब हुए हैं। इनमें से ज्यादातर के बारे में कोई अता-पता नहीं चल पाया है और बच्चों के गायब होने का सिलसिला जारी है। दरअसल, यह समस्या सिर्फ कानपुर तक ही सीमित नहीं है। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि बच्चे तो तकरीबन हर बड़े शहर से गायब हो रहे हैं लेकिन हर शहर की बात संसद तक नहीं पहुंच रही है।

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आखिर कब तक जारी रहेगा दलितों का उत्पीड़न

समाज - 1 Comment » - Posted on July, 25 at 11:14 am

एशियाई सेंटर फाॅर हयूमन राइटस ने इंडियन हयूमन राइटस रिपोर्ट 2009 जारी की है। इस रपट को तैयार करने के लिए कई स्रोतों से जुटाए गए आंकड़ों को शामिल किया गया है। राष्टीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों का इस्तेमाल भी इस रपट को तैयार करने में किया गया है। इस रपट में वैसे कई क्षेत्रों की बदहाली पर चर्चा की गई है। इस रपट में यह भी बताया गया है कि दलितों के खिलाफ होने वाले आपराधिक मामलों में कमी नहीं आ रही है। दलितों को निशाना बनाए जाने के मामले में कोई भी राज्य पीछे नहीं है।

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बिगड़ी हालत सेहत की

समाज - No Comments » - Posted on July, 19 at 8:20 am

देश में जन स्वास्थ्य की हालत सुधारने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। हर साल इन योजनाओं पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। पर जन स्वास्थ्य के मौजूदा हाल को देखते हुए यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि आखिर यह पैसा जा कहां रहा है। जमीनी स्तर पर तो स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा तो जस का तस बना हुआ है। लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

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पुलिस सुधार है बेहद जरूरी

समाज - 1 Comment » - Posted on July, 16 at 6:46 am

बीते दिनों गाजियाबाद निवासी रणवीर सिंह की हत्या देहरादून पुलिस ने कर दी। यह मामला अभी भी गरमाया हुआ है। रणवीर के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसके शरीर पर चोट के 28 निशान थे। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उसकी पिटाई बंदूक से बट से की थी। वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर से बीच-बीच में पुलिस द्वारा बलात्कार किए जाने की खबरें आती रहती हैं। पुलिसिया जुल्म की ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। समय-समय पर पुलिस का यह दमनकारी और आपराधिक रवैया मीडिया की सुर्खियां बनता रहा है।

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बदलने वाली है ईमेल की परिभाषा

विविधा - 1 Comment » - Posted on July, 10 at 3:29 pm

कहा जा रहा है कि गूगल ईमेल की परिभाषा बदलने वाली है। तमाम सुविधाएं एक ही प्लेटफार्म पर मुहैया हो जाने से ईमेल इस्तेमाल के तौर-तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसके अलावा तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे ट्विट्र को भी गूगल वेव से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए एक गैजेट बनाया गया है जिसे नाम दिया गया है ट्वेव। इसके जरिए आपके दोस्तों के ट्विट् तो आप तक पहुंचेंगे ही साथ ही साथ आप उनका जवाब गूगल वेव पर ही दे सकते हैं।

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स्कूलों में भी भेदभाव के शिकार हैं दलित बच्चे

समाज - 1 Comment » - Posted on July, 10 at 8:59 am

यूनिसेफ के सहयोग से दलित आर्थिक आंदोलन और नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स ने मिलकर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन स्कूलों में दलित बच्चों की स्थिति का जायजा लेने के मकसद से किया गया। इसके नतीजे बेहद चैंकाने वाले हैं। इस रपट में जिन-जिन राज्यों का अध्ययन किया गया उन सब राज्यों के स्कूली बच्चों के साथ स्कूल में भेदभाव बस इसलिए किया गया क्योंकि वे दलित थे। इस रपट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भेदभाव की वजह से बड़ी संख्या में दलित बच्चे अपने आगे की पढ़ाई बरकरार नहीं रख पाते।

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सवालों के घेरे में ईवीएम मशीन

राजनीति - 1 Comment » - Posted on July, 8 at 9:03 am

पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता के शोर में कई अहम बातें दब कर रह गईं। ये ऐसी बातें हैं जिन पर एक लोकतांत्रिक समाज में बहस होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर उनकी जांच भी होनी चाहिए। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और आईआईटी स्नातक ओमेश सहगल ने इलैक्टोनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के प्रोग्रामिंग पर सवालिया निशान लगा दिया है। उनका दावा है कि देश में प्रयोग किए जा रहे ईवीएम में एक खास कोड डाल देने भर से किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में हर पांचवां वोट चला जाता है।

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स्पैम ईमेल बंद हो तो रोशन हो जाएं 24 लाख घर

आर्थिक, विविधा - 2 Comments » - Posted on July, 7 at 10:05 am

कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोग मैकेफी के नाम से वाकिफ होंगे। एंटी वायरस बनाने वाली कंपनियों में मैकेफी एक बड़ा नाम है। इसने हाल ही में एक अध्ययन जारी किया। इसमें यह बताया गया है कि ईमेल के जरिए भेजे जाने वाले अनचाहे संदेशों यानी स्पैम का पर्यावरण पर क्या असर पड़ रहा है। मैकेफी ने अनुमान लगाया है कि दुनिया भर में जितने स्पैम एक साल में भेजे जाते हैं, उसे बनाने, भेजने और रोकने में जितनी ऊर्जा खर्च होती है उससे 24 लाख घरों की बिजली की जरूरत को पूरा किया जा सकता है, या फिर 31 लाख कारों को चलाया जा सकता है।

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रवांडा से भी बदतर हालत में है ‘महाशक्ति भारत’

आर्थिक, समाज - No Comments » - Posted on July, 5 at 9:32 am

भय और भूख भारत की नियति बन चुके हैं. विकास की चारमीनार पर चढ़ने का दावा करनेवाले भारत के प्रगति की भूख जितनी विकराल दिखाई देती है उससे अधिक विकराल है भारत में पेट की भूख. ग्लोबल हंगर इंडेक्स बार-बार यह बता रहा है कि भूख के मामले में भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान और नेपाल ही नहीं बल्कि रवांडा से भी बुरी हालत में है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स बता रहा है कि भोजन के मामले में भारत अफ्रीकी देशों के ही बराबर खड़ा है.

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Nothing New in Poll Result

राजनीति, समाज - 2 Comments » - Posted on July, 4 at 8:16 am

A lot of incorrect factual information is being circulated by different sources regarding this poll result. Major political parties, political analyst and mainstream media is looking happy on the emergence of new political trends in Indian politics. Is it true?

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