रेल मुनाफे का अहसास

दुनियादारी - No Comments » - Posted on March, 31 at 11:14 am

इस मर्तबा के अंतरिम रेल बजट में भी रेल मंत्री लालू यादव ने रेल के मुनाफे का राग एक दफा फिर से अलापा है। कई अखबारों में बड़ी-बड़ी विशेष रपट छापकर यह बताया गया कि आखिर कैसे घाटे में चलने वाली रेल जबर्दस्त मुनाफे में आ गई। रेल मंत्री के मुनाफे के खेल को पिछली रेल यात्रा में मैंने भी महसूस किया। बीती दिवाली को घर जाने के लिए तकरीबन ढाई महीने पहले टिकट करवाया था। अभी भी घर जाने के नाम पर जाने वाले दिन की उलटी गिनती शुरु हो जाती है।

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सवाल नीयत में खोट का

मीडिया - No Comments » - Posted on March, 31 at 8:16 am

एक मर्तबा फिर आत्मनियमन की बात मीडिया में चलने लगी है। मीडिया के लिए और लोकतंत्र के लिए भी किसी तरह का सरकार नियंत्रण तो नहीं ही ठीक होगा लेकिन आत्मनियमन की बात से पहले कुछ बुनियाद बात जरूरी है। अभी जिस तरह से मीडिया और खास तौर पर खबरिया चैनलों के जरिए जिस तरह से गंध घोला जा रहा है, उसी पर बहस आकर रूक जाती है। जबकि मीडिया में व्याप्त अराजकता के सवाल को एक बड़े फलक पर ले जाया जाना चाहिए।

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Why We Need Examination Reforms?

समाज - 1 Comment » - Posted on March, 12 at 12:38 pm

The examination system of India has remained unchanged from so many years. That’s why most of Newspapers and Magazines publish articles on this topic during examination session. In this system of India, ability of a student is decided by an exam. In this system there is no place for performance of a student in full academic session. Scoring more and more marks in exams has become the only aim of a student. Impact of this stressful examination system is immense. Those who are in favour of this system should think about those bad impacts. First of all, if this system is good then all those who secure good marks in these must be brilliant and successful in life but reality is different.

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ऐसे तो पत्रकारिता बचने से रही

मीडिया, मेहमान पन्ना - No Comments » - Posted on March, 12 at 8:42 am

कहा जा रहा है कि सारा संसार विश्वग्राम हो गया है। इसमें सभी छोटे हैं और बड़ी है तो सिर्फ टेक्नोलाजी। जिस विज्ञान ने यह कहा कि द वर्ल्ड इज बिकमिंग अ ग्लोबल विलेज, वह ग्लोबल तो जानता था लेकिन विलेज को नहीं जानता था। गांव केवल छोटी सी बस्ती नहीं है बल्कि गांव एक जैविक समाज है। हम जिस टेक्नोलाजी को बढ़ा रहे हैं वह सब चीजों को छोटी करके जैविक समाज को नष्ट करने वाली टेक्नोलाजी है। यानी आदमी छोटा है, उसकी मशीन उससे बड़ी है।

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