पर्यावरण, राजनीति, समाज - 2 Comments » - Posted on July, 23 at 6:21 am
The seventh Millennium Development Goal (MDG) is to ensure environmental sustainability. Under MDG-7, it was targeted that the principles of sustainable development would be integrated into country policies and programmes to reverse the loss of environmental resources. But, UNDP’s MDG report, 2010 is telling a different story about the efforts of environmental sustainability. Global deforestation is slowing, but continues at a high rate in many countries. Over the last decade, about 13 million hectares of forest worldwide were converted to other uses or lost through natural causes each year.
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आर्थिक, पर्यावरण - No Comments » - Posted on June, 25 at 7:22 am
Even after spending around Rs. 29,000 Crore and almost 49 years on Sardar Sarovar Project (SSP) of Gujrat, only 29 percent of canal network has been completed. The implementation of the project is progressing with very slow pace of 3 percent per year. A recent report of People’s Inquiry Committee captioned ‘Narmada Project: A Monument of Mis-management’ exhibits this alarming picture.
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पर्यावरण - 1 Comment » - Posted on January, 9 at 7:28 am
The Central Pollution Control Board (CPCB) has released a report on water consumption and sewage disposal patterns. According to this report, the biggest cities in India are only treating 50 per cent of sewage they generate. This report shows that 35 cities of country are pumping 7,604 million liters of sewage per day into rivers and the sea. Tones of sewage are going to the sacred Ganga. The findings of this report should be a matter of serious concern to policy makers as well as society.
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पर्यावरण - No Comments » - Posted on December, 22 at 11:44 am
वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों की जब भी बात चलती है तो जैव ईंधन का नाम भी स्वभाविक तौर पर जेहन में कौंधता है। भारत में भी जैव ईंधनों के उत्पादन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों में तेजी लाने की बात की जा रही है। पर जैव ईंधन के मसले पर हालिया दिनों में हुए अध्ययन के नतीजे चैंकाने वाले हैं। इंग्लैंड के पर्यावरण विभाग के वैज्ञानिकों ने शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि दुनिया जैव ईंधन के उत्पादन के पीछे पगलाई जा रही है लेकिन इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना कम ही है।
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आर्थिक, पर्यावरण, समाज - 1 Comment » - Posted on December, 21 at 7:49 am
जब सरकारी स्तर पर यह बात आने लगी कि पीने का साफ पानी नहीं मिल सकता है तो पानी के कारोबारियों के मन के हिसाब से माहौल बन गया। इसका नतीजा यह हुआ कि पानी से संबंधित कारोबारों में उफान आने लगा। इनमें सबसे ज्यादा कारोबार बढ़ा पानी शुद्ध करने का दावा करने वाली मशीन बनाने वाली कंपनियों का और बोतलबंद पानी का। इन दोनों का कारोबार आज अरबों में पहुंच गया है और दिनोंदिन इसमें बढ़ोतरी हो रही है। पर कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात साबित हो गई है कि जिन दावों के आधार पर इन दोनों कारोबारों का खड़ा किया गया है वे काफी हद तक खोखले हैं।
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पर्यावरण - No Comments » - Posted on December, 17 at 12:38 pm
दुनिया की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। भारत की भी कई प्रजातियां विलुप्त होने के मुहाने पर खड़ी हैं। वैश्विक स्तर पर इंटरनेशनल यूनियन फार कजर्वेशन आफ नेचर नाम की एक संस्था पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मसलों पर काम करती है। इस संस्था ने हाल ही में एक रपट जारी की है। इस रपट में यह बताया गया है कि भारत के 687 प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे को झेल रही है। इनमें जानवरों और पौधों की प्रजातियां हैं। बताते चलें कि 2008 में यह संख्या 659 थी। यानी एक साल के दौरान खतरे के दायरे में आने वाली प्रजातियों की संख्या में 28 का इजाफा हुआ।
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पर्यावरण - 2 Comments » - Posted on December, 17 at 9:35 am
अनुपम मिश्र कहते हैं कि धरती पर देश बंटे हुए हैं। थोड़ा-बहुत विवाद भले ही हो लेकिन उनकी सीमाएं तय हैं। इसी तरह आकाश तक की सीमाएं हमने बनाई हैं लेकिन धुआं सीमा को नहीं मानता। किसी भी देश का धुआं दूसरे देश में और दूसरे प्रदेश में बराबर आएगा और जाएगा। इसलिए अनुपम मिश्र मानते हैं कि बात कुल मिलाकर धुआं कम करने की जरूरत है।
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पर्यावरण - 1 Comment » - Posted on December, 14 at 8:42 am
हर तरफ से कार्बन उत्सर्जन में कमी की बात को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि लोग इस बात को समझने लगे हैं कि पर्यावरण की सेहत को बिगाड़ना उनके लिए ठीक नहीं है। मालूम हो कि तेजी से बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के लिए मौजूदा ऊर्जा उत्पादन तकनीक भी जिम्मेवार है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि सौर ऊर्जा की तकनीक को अगर और बेहतर बनाया जाए तो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में काफी मदद मिलेगी।
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पर्यावरण - 4 Comments » - Posted on December, 11 at 10:08 am
भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कभी चरखे को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया था। आज गांधी के उसी संदेश को एक बार फिर राजस्थान के एक गांव के लोगों ने चरखे के जरिए पूरे देश को देने की कोशिश की है। इस गांव का नाम है जटवारा। आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने वाले चरखे को ई-चरखा का नाम दिया गया है। इस चरखे को तमिलनाडु के एक गांधीवादी कार्यकर्ता एकंबर नाथ के अंबर चरखा में तकनीकी सुधार करके बनाया गया है। इस काम को अंजाम तक पहुंचाया है बंगलोर के इजीनियर आरएस हिरेमथ ने।
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पर्यावरण - 1 Comment » - Posted on December, 8 at 7:40 am
तेजी से बिगड़ता पर्यावरण पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। यह जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता ही है कि दुनिया के 192 देशों के बड़े नेता कोपेनहेगन में इस मसले पर बातचीत करने के लिए एकत्रित हुए हैं। दुनिया के कई वैज्ञानिकों ने प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला है कि आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन पलायन की एक बड़ी वजह बनने जा रहा है।
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