10 बातें ‌जिन्हें रेल बजट में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

हिमांशु शेखर

केंद्रीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के लिए यह पहला मौका होगा जब वे रेल बजट पेश करेंगे. पहले के रेल मंत्रियों ने रेलवे को जो राजनीतिक इस्तेमाल किया है उससे आज रेलवे बहुत बुरी स्‍थिति में है. ऐसे में त्रिवेदी के सामने यह चुनौती है कि वे कैसे रेलवे की सेहत को सुधारते हैं. रेल सीधे तौर पर देश की बड़ी आबादी के जीवन से जुड़ा हुआ है इसलिए भी इस तंत्र को ठीक करना बेहद जरूरी है. ऐसे में इस बात को समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर वो कदम क्या होंगे जिनके जरिए भारतीय रेल की सेहत सुधारी जा सकती है.

यात्री सुरक्षा
तकरीबन दो करोड़ लोग हर रोज भारत में रेल की यात्रा करते हैं. यात्रा के दौरान इनकी जान की हिफाजत सुनिश्‍चित करने के उपायों को टालना अब रेल मंत्री के लिए मुमकीन नहीं है. क्योंकि पिछले दो साल से चल रहा रेल दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा और लोग अब ट्रेन में चलते हुए डरने लगे हैं.

बुनियादी ढांचे पर निवेश
बढ़ती रेल दुर्घटनाओं और रेलवे की बदहाल सेवा को रेलवे के कमजोर बुनियादी ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा है. रेल नेटवर्क का विस्तार हो नहीं रहा और पुराने नेटवर्क पर ही बोझ बढ़ता जा रहा है. इससे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं और रेलवे को आर्थिक नुकसान भी. बड़ी संख्या ऐसे रेल पुलों की है जो जर्जर अवस्‍था में हैं और दुर्घटना को दावत दे रहे हैं.

खाली पदों पर भर्ती
रेलवे की खराब सेवा के लिए इस विशाल तंत्र में खाली पड़े तकरीबन 2.5 लाख पदों को भी एक बड़ी वजह के तौर पर गिनाया जा रहा है. इसमें से तकरीब डेढ़ लाख पद सुरक्षा श्रेणी के हैं. अगर रेल मंत्री चाहते हैं कि रेलवे की साख बनी रहे तो इस रेल बजट में उन्हें इन खाली पदों को भरने के लिए किसी ठोस रणनीति की घोषणा करनी चाहिए.

तकनीकी उन्नयन
जानकार बताते हैं कि दुनिया के प्रमुख देशों का रेल तंत्र तकनीकी मोर्चे पर नए बदलावों के दौर गुजर रहा है लेकिन भारत में इस मोर्चे पर कुछ खास नहीं हो रहा. सुरक्षा संबंधी जो उपकरण दूसरे देशों में सालों पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं वे भारत में अब भी इस्तेमाल नहीं किए जा रहे. वजह पैसे की कमी को बताया जाता है. इस बार के रेल बजट में यह देखना होगा कि रेल मंत्री इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं.

प्रशिक्षण
रेलवे के कई विशेषज्ञ खराब सेवा और दुर्घटनाओं के लिए रेलकर्मियों को उचित प्रशिक्षण नहीं मिलने को जिम्मेदार ठहराते हैं. काकोदकर समिति ने भी उचित प्रशिक्षण सुनिश्‍चित करने के लिए कई सिफारिशें की हैं. रेल मंत्री से उम्मीद की जा रही है कि वे नए रेल बजट में प्रशिक्षण ढांचे को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करेंगे ताकि सही और सुरक्षित ढंग से सेवाओं का संचालन हो सके.

ठेकों में पारदर्शिता
रेल के अंदर खान-पान की बदतर हालत के लिए ठेके की गलत प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. साफ-सफाई की बुरी हालत से लेकर रेलवे से संबंधित निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है. रेलवे को समझने वाले लोगों का कहना है कि रेल मंत्री को ठेकों में पारदर्शिता सुनिश्‍चित करना चाहिए क्योंकि इससे कई मोर्चे पर गुणात्मक सुधार दिखेगा.

राजनीति हस्तक्षेप
खुद रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने फिक्की के एक कार्यक्रम में यह स्वीकार किया था कि रेलवे में राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से कई समस्याएं खड़ी होती हैं. रेल मंत्री के सामने यह चुनौती है कि वे कैसे अपना बजट राजनीति से परे हटकर पेश करते हैं. पश्‍चिम बंगाल में इस साल पंचायत चुनाव होने हैं और पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी विधानसभा चुनावों की तरह रेल बजट का इस्तेमाल इस बार भी चुनावी लाभ के लिए जरूर करना चाहेंगी.

आमदनी के नए स्रोत
रेलवे की सभी समस्याओं की जड़ में पैसे की कमी को वजह बताया जाता है. इस वजह से न तो बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है और न ही घोषणाओं पर क्रियान्वयन हो पा रहा है. यात्री किराये से आमदनी बढ़ाने की अपनी सीमाएं हैं. ऐसे में देखना होगा बजट में रेल मंत्री आमदनी बढ़ाने के लिए क्या नए उपाय करते हैं. कुछ जानकार रेलवे की खाली पड़ी जमीन को व्यावसायिक इस्तेमाल को आमदनी बढ़ाने का अहम औजार बताते हैं.

सेवाओं का स्तर सुधारना
रेलवे की सेवाओं के स्तर से आज शायद ही कोई रेल यात्री खुश होगा. ट्रेनों का देर से अपने गंतव्य तक पहुंचना और गंदगी, भारतीय रेल का पर्याय बन चुके हैं. ट्रेन में और स्टेशन पर खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से लेकर मनमानी कीमत वसूले जाने से भी यात्री काफी परेशान हैं. नए बजट में इन परेशानियों को दूर करने के उपाय करके रेल मंत्री के पास रेल यात्रियों को बड़ा सौगात देने का मौका है.

पुरानी घोषणाओं का क्रियान्वयन
नेताओं और वह भी रेल मंत्री के पद पर बैठे व्यक्‍ति की बातों पर लोगों का भरोसा बना रहे, इसके लिए यह जरूरी है कि पहले के रेल मंत्रियों ने जो घोषणाएं की हैं, उनका क्रियान्वयन नए रेल मंत्री सुनिश्‍चित करें. यह काम एक झटके में नहीं हो सकता लेकिन इस बार के रेल बजट से इस दिशा में ठोस शुरुआत तो हो ही सकती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *