सौर ऊर्जा से सुलझेगी समस्या

हिमांशु शेखर

दुनिया के 192 देशों के नेता जलवायु परिवर्तन पर बातचीत करने के लिए कोपेनहेगेन में एकत्रित हुए हैं। कहना न होगा कि बिगड़ते पर्यावरण को लेकर पूरी दुनिया में चिंता की लहर है। हर तरफ से कार्बन उत्सर्जन में कमी की बात को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि लोग इस बात को समझने लगे हैं कि पर्यावरण की सेहत को बिगाड़ना उनके लिए ठीक नहीं है। मालूम हो कि तेजी से बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के लिए मौजूदा ऊर्जा उत्पादन तकनीक भी जिम्मेवार है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि सौर ऊर्जा की तकनीक को अगर और बेहतर बनाया जाए तो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में काफी मदद मिलेगी।

मालूम हो कि अभी भी कई देशों में कोयले से बिजली का उत्पादन हो रहा है। बिजली उत्पादन के लिए सबसे सस्ता जरिया अभी भी कोयला ही बना हुआ है। पर कार्बन क्रेडिट की पेंच ने कोयले के प्रयोग को हतोत्साहित करना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि कार्बन क्रेडिट वह व्यवस्था है जिसके तहत प्रदूषण के स्तर के आधार पर हर देश को अंक मिलते हैं। प्रदूषण की मात्रा एक निश्चित सीमा से अधिक होने पर उस देश को जुर्माना भरना पड़ता है या फिर दूसरे देश से कार्बन क्रेडिट खरीदना पड़ता है। कोयले से बिजली बनाने के दौरान भारी मात्रा में कार्बन डाय आॅक्साइड का उत्सर्जन होता है। इसके निस्तारण के लिए अभी तक कोई सस्ता और सुलभ तरीका नहीं ढूंढा जा सका है। जो तरीके अभी जानकार बता रहे हैं, वे काफी महंगे हैं।

यही वजह है दुनिया भर में बिजली उत्पादन के लिए वैकल्पिक माध्यमों को मजबूत करने पर खासा जोर दिया जा रहा है। अलग-अलग देशों में चल रहे वैज्ञानिक शोधों का ही नतीजा है कि सौर ऊर्जा के उत्पादन की राह आसान होती जा रही है। सूरज की किरणों को बिजली में तब्दील करके उसके उपयोग की हर संभावना को मूर्त रूप देने की हरसंभव कोशिश इसलिए भी की जा रही है कि इनकी उपलब्धता को लेकर कम से कम अभी तो कोई संकट नजर नहीं आ रहा है।

वैज्ञानिक इस योजना पर काम कर रहे हैं कि हर घर के छत पर सौर प्लेट लगे और वह इतनी ऊर्जा का उत्पादन कर सके कि उस घर की ज्यादातर जरूरतें पूरी की जा सकें। नैनोतकनीक के आ जाने से सौर प्लेटों की कार्यकुशलता बढ़ी है। अब जो नए सौर प्लेट बन रहे हैं, उसमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सौर किरणों का हर फोटोन बिजली में तब्दील हो जाए। वैश्विक स्तर पर अभी फोटोवोल्टेयिक सेल की धूम है। इसके व्यवसाय की सलाना विकास दर पचास फीसद है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इससे बनने वाली बिजली का उत्पादन लागत अपेक्षाकृत कम है और इसमें निरंतर कमी आ रही है। ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका में काम कर रही कैंब्रिज एनर्जी रिसर्च एसोशिएट्स की एक रपट में बताया गया है कि 1995 में फोटोवोल्टेयिक सेल से एक किलोवाट बिजली उत्पादन करने में जो लागत आती थी वह 2005 में साठ फीसद घट गई। जाहिर है कि जब उत्पादन लागत घटेगी तो इस ओर लोगों का स्वभाविक तौर पर रूझान बढ़ेगा और ऐसा वहां हुआ भी है।

पारंपरिक सौर प्लेट सिलिकान से बने होते हैं। इसी से कंप्यूटर चीप का निर्माण भी किया जाता है। सौर प्लेटों की लागत को कम करने के लिए अमेरिका के एक वैज्ञानिक ने स्ट्रिंग रिबन तकनीक ईजाद की। इसके जरिए सौर प्लेट में लगने वाले सिलिकाॅन की मात्रा घटकर आधी हो गई। इसके अलावा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम कर रहे जानकार सौर प्लेटों की कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए भी प्रयासरत हैं। इस कड़ी में सौर प्लेट के अंदर मौजूद चांदी के तारों को अधिक से अधिक पतला बनाया जा रहा है। इसके जरिए यह संभव हो पा रहा है कि ये तार कम से कम बिजली की मात्रा को रोक कर रख पा रहे हैं और सौरप्लेटों की कार्यकुशलता बढ़ रही है। अध्ययन बता रहे हैं कि आने वाले दिनों मे सौर किरणों से बनाई जाने वाली बिजली और कोयला से बनाई जाने वाली बिजली की उत्पादन लागत में कोई फर्क नहीं रहेगा।

इस क्षेत्र में नए-नए तकनीक तलाशे जाने की वजह से सौर प्लेटों की कीमतों में भी काफी कमी आई है। कीमत को और कम करने के मकसद से वैज्ञानिक अब ऐसी तरकीब भी खोज रहे हैं कि सौर प्लेट बनाने में सिलिकाॅन की जरूरत ही नहीं पड़े। अमेरिका में कुछ वैज्ञानिकों ने कैडमियम टेलुराइड से सौर प्लेट का निर्माण भी किया है। इसके अलावा काॅपर, इंडियम, गैलियम और सेलेनियम के मिश्रण से भी सौर प्लेट की फिल्म बनाने में भी इस क्षेत्र में काम कर रहे धुरंधरों ने सफलता हासिल की है। इस मिश्रण से बना प्लेट कैडमियम टेलुराइड से बने प्लेट की अपेक्षा अधिक कार्यकुशल भी है और सस्ता भी।  
सोलर प्लेट के सेल सीधे सूर्य की किरणों को बिजली में बदल देते हैं। पर सौर किरणों से बिजली बनाने की दूसरी तकनीक भी अब अपनाई जा रही है। दुनिया में कई स्थानों पर सूरज की किरणों की मदद से पानी को खौलाया जाता है। इसके बाद इसके जरिए टरबाइन चलाई जाती है। जिससे बिजली का उत्पादन होता है। पर सौर ऊर्जा के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि अगर एक जगह पर आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन हो भी जाता है तो उसका वितरण आसान नहीं है। हालांकि, इस दिशा में भी ऊर्जा विशेषज्ञ काम कर रहे हैं और आने वालों दिनों में इस समस्या से निजात पाने की तरकीब तलाश लिया जाना संभव है।

जिन देशों में रेगिस्तानी क्षेत्र है उनके लिए सौर ऊर्जा आमदनी का एक बड़ा जरिया साबित होने लगा है। क्योंकि ऐसे इलाकों में एक ही जगह पर अनेकों सौर प्लेट लगाना संभव है और इसके जरिए भारी मात्रा में बिजली का उत्पादन किया जाना संभव हुआ है। ऐसे स्थानों पर सौर प्लेटों से उत्पन्न ऊर्जा से पहले टरबाइन चलाया जाता है जिससे बिजली का उत्पादन होता है। जिसे दूर-दूर तक भी भेजा जा सकता है। अल्जीरिया और मोरक्को में यह चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। रेगिस्तान में भारी मात्रा में लगाए जाने वाले सौर प्लेटों के चलन को मिरर फार्मिंग का नाम दिया जा रहा है। अनुमान लगाया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा का उत्पादन आने वाले चार साल मंे दस गुना बढ़ जाएगा। दुनिया के ज्यादातर देश वैसे स्थानों को चिन्हित कर रहे हंै जहां बड़ी संख्या में सौर प्लेट लगाए जा सकें और सूर्य की किरणों से भारी मात्रा में बिजली का उत्पादन किया जा सके।

1 thought on “सौर ऊर्जा से सुलझेगी समस्या

  1. बहुत ही सार्थक विषय पर सारगर्भित आलेख लिखा आपने । अफ़सोस है कि उर्जा की इतनी कमी होने के बावजूद भारत जो इस उर्जा के लिहाज से काफ़ी धनी है ने भी इसे अभी तक उपेक्षित ही रखा है …

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