भारतीय रेल के लिए चीन के सबक

हिमांशु शेखर

आज हर मामले में भारत और चीन की तुलना होती है. अगर रेल के क्षेत्र में इन दोनों देशों की तुलना हो तो एक समय इस मामले में भारत से काफी पीछे रहा चीन आज भारत से काफी आगे निकल गया है. भारत में पहली रेल 1853 में दौड़ी थी जबकि चीन में इसके 23 साल बाद यानी 1876 में पहली रेलगाड़ी चली थी. जब 1947 में भारत आजाद हुआ तो उस समय भारत का रेल नेटवर्क 53,596 किलोमीटर में फैला हुआ था जबकि उस वक्त चीन का रेल नेटवर्क सिर्फ 27,000 किलोमीटर का था. आजादी के 65 साल कुछ महीने में पूरे हो जाएंगे और तब से लेकर अब तक भारत के रेल नेटवर्क में 10,000 किलोमीटर की बढ़ोतरी भी नहीं हो पाई. अभी देश के कुल रेल नेटवर्क की लंबाई 64,015 किलोमीटर है. जबकि चीन 78,000 किलोमीटर के रेल नेटवर्क के साथ भारत से इस मामले में काफी आगे निकल गया है.

चीन के पास मालवाहक डब्बों की संख्या 5.7 लाख है जबकि भारत के पास 2.25 लाख मालवाहक डब्बे ही हैं. यही वजह है कि चीन माल ढुलाई के मामले में भारत से 4.5 गुना आगे है. सवारी कोचों की संख्या के मामले में दोनों देश बराबरी के करीब हैं. चीन की सरकार ने अगले दस साल में वहां के रेलवे में 15 लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है. यानी हर साल तकरीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा. जबकि भारत का पिछला रेल बजट ही कुल 57,630 करोड़ रुपये था. यानी रेलवे में निवेश के मामले में भी भारत चीन से काफी पीछे है. चीन में चलने वाली रेलगाडि़यां गति के मामले में भी भारतीय रेलगाडि़यों से काफी आगे हैं. चीन में 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली गाडि़यां हैं तो भारत में अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे की है. इससे पता चलता है कि दोनों देशों में बिछी पटरियों और बुनियादी ढांचे में कितना फर्क है.

चीन रेलवे के अच्छे प्रदर्शन की एक बड़ी वजह यह है कि वहां रेलवे के सभी कार्यों को एक ही विभाग के तहत नहीं रखकर इसे अलग-अलग स्वायत्त विभागों में बांटा गया है. इसके अलावा वहां की सरकार ने स्थानीय स्तर पर 2000 किलोमीटर तक का रेल नेटवर्क विकसित करने की छूट स्थानीय प्रशासन को दे रखी है. अब तक हजारों किलोमीटर के ऐसे रेल नेटवर्क वहां विकसित हो चुके हैं. चीन की आबादी भारत से कहीं अधिक है इसके बावजूद वहां की सरकार ने रेल नेटवर्क को तेजी से विकसित किया है. कभी रेल नेटवर्क के मामले में चीन से आगे रहने वाले भारत के लिए चीन से होड़ लगाने की तो जरूरत नहीं लेकिन कुछ सबक लेकर भारतीय रेल की सेहत सुधारने की आवश्यकता जरूर महसूस होती है.

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