‘भाजपा में परिवारवाद नहीं कार्यकर्तावाद चलता है’

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की नई टीम पार्टी के बड़े नेताओं के सगे-संबंधियों को जगह देने की वजह से ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ का दावा करने वाली भाजपा पर परिवारवाद का शिकार होने का आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि राजवीर सिंह को इसलिए जगह दी गई क्योंकि कल्याण सिंह की पार्टी का भाजपा में विलय या यों कहें कि उनकी वापसी की शर्तों में से एक शर्त यह भी थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी हिमांशु शेखर  को बता रहे हैं कि सभी को योग्यता के आधार पर संगठन में जगह दी गई है

जिस तरह से प्रदेश की नई टीम में पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के सगे-संबंधियों को जगह दिया गया उससे भाजपा पर भी परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है। आप क्या कहेंगे?
प्रदेश की पूरी टीम में सदस्यों की संख्या 131 होती है। इनमें से चार लोग ऐसे हैं जो पार्टी के किसी न किसी बड़े नेता के संबंधी हैं। जिन चार लोगों को संगठन में जगह दी गई है, उन्हें उनके काम को देखते हुए यह जिम्मेदारी दी गई है। हमारे राष्टीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को लेकर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं। लेकिन पंकज तो पहले से टीम में थे। उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए काम करने वाले लोग जानते हैं कि पंकज सिंह पिछले 16 साल से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए अगर अब उन्हें संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी मिली है तो यह कहना ठीक नहीं है कि उन्हें राजनाथ सिंह का पुत्र होने की वजह से यह स्थान मिला है। गोपाल टंडन भी दो दफा चुनाव लड़ चुके हैं। राजवीर सिंह प्रदेश मंे मंत्री भी रहे हैं। प्रेमलता कटियार का काम अगर किसी को जानना हो तो वह कानपुर देहात में जाकर पता लगा सकता है।

आप जिन लोगों का नाम ले रहे हैं उनमें से गोपाल टंडन और राजवीर सिंह तो पिछला चुनाव भी हार गए थे। मतलब चुनावी राजनीति में इनका प्रदर्शन ठीक नहीं रहा लेकिन फिर भी इन्हें जगह मिली। इससे परिवारवाद के आरोप को और बल मिलता है?
चुनावी राजनीति में हार-जीत लगी रहती है। कई बड़े नेता चुनाव हारे हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि उनमें योग्यता नहीं है या उन्होंने पार्टी के लिए काम करना छोड़ दिया। मैं भी सात बार चुनाव लड़ा हूं और इनमें से दो बार मुझे भी हार का मुंह देखना पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद मैैं लोगों के बीच रहा और काम करता रहा। आप जिनका नाम ले रहे हैं, इन लोगों ने भी यही किया है।

योग्यता की दुहाई तो वे पार्टियां भी देती हैं जिन पर भाजपा परिवारवाद का आरोप लगाती है। आप भी वही तर्क दे रहे हैं। ऐसे में अब भाजपा को उनसे अलग करके कैसे देखा जाए?
भाजपा में निर्णय सामूहिक होता है। ऐसा नहीं कि कांग्रेस की तरह मां-बेटे मिलकर सारे फैसले कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के तरह बाप-बेटे की जोड़ी भी भाजपा में सारे फैसले नहीं करती। अगर भाजपा परिवारवाद को बढ़ावा देने वाली पार्टी होती तो मेरे जैसा कार्यकर्ता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन पाता।

लेकिन क्या इस फैसले से कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं टूटेगा? क्या उन्हें ऐसा नहीं लगेगा कि बड़े नेताओं का सगा-संबंधी होना ही योग्यता का पैमाना बन गया है?
नहीं, ऐसा नहीं है। पहली बात तो यह कि जिन लोगों की बात आप कर रहे हैं उन्हें कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर काम करते देखा है। इसके अलावा यह एक तथ्य है कि प्रदेश की नई टीम में 40 फीसदी नए चेहरे हैं। 36 फीसदी स्थान महिला कार्यकर्ताओं को दिया गया है। इसलिए मैं इस बात को लेकर निश्चिंत हूं कि कार्यकर्ताओं में इस तरह की दुर्भावना नहीं बैठेगी कि भाजपा परिवारवाद की पोषक है। यह बात हर भाजपा कार्यकर्ता को पता है कि भाजपा में परिवारवाद नहीं बल्कि कार्यकर्तावाद है।

कहा जा रहा है कि राजवीर सिंह को इसलिए जगह दी गई क्योंकि कल्याण सिंह की पार्टी का भाजपा में विलय या यों कहें कि उनकी वापसी की शर्तों में से एक शर्त यह भी थी। क्या कहेंगे?
नहीं, यह बात तथ्य से बिल्कुल अलग है। राजवीर सिंह न सिर्फ विधायक रहे बल्कि वह प्रदेश में मंत्री भी रहे हैं। राजवीर सिंह जनक्रांति पार्टी के अध्यक्ष भी थे। जनक्रांति पार्टी के पहले भी वे भाजपा के लिए काम करते रहे हैं। राजवीर ने खुद मेरे साथ प्रदेश में काफी काम किया है। उन्होंने जो भी काम पार्टी में किया वह कल्याण सिंह का पुत्र होने के नाते नहीं किया बल्कि भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते किया।

आपकी जिस टीम के गठन पर परिवारवाद का आरोप लगा उसके बूते आप 2014 के लोकसभा चुनाव की चुनौती का सामना कैसे कर पाएंगे?
मैं आपको यकीन दिलाना चाहूंगा कि यह टीम उत्तर प्रदेश में ऐसा परिणाम देगी कि पार्टी के लिए केंद्र में अपनी सरकार बनाने का रास्ता साफ होगा। अगले एक साल में हमारा मकसद यह होगा कि जातिवाद की राजनीति करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों को बेनकाब करना। आप देखिएगा कि आज जिन लोगों पर सवाल उठ रहे हैं, यही लोग ऐसा काम करेंगे कि फिर कहा जाएगा कि इन्हें शामिल करने का फैसला बहुत अच्छा था।

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