पंजाब चुनाव की पांच रोचक बातें

हिमांशु शेखर

इस बार का पंजाब चुनाव कई मामलों में प्रदेश में अब तक हुए चुनावों से अलग है. पहली बार यहां की राजनीति में तीसरा कोण दिख रहा है. वहीं प्रमुख नेताओं के कोटे से टिकट पाने वालों में राहुल गांधी के कोटे से टिकट पाने वाले भी शामिल हो गए हैं. पहली बार बड़े रोचक अंदाज में राज्य के दो प्रमुख दलों में विज्ञापन युद्ध दिख रहा है. इसके लिए नामी कंपनियों का सहारा लिया गया है. वहीं चुनाव आयोग की कड़ाई कई नेताओं के सियासी स्वाद को कड़वा बना रही है. अंधविश्वास की छाया से भी इस बार का चुनाव बचा नहीं रह सका है. ऐसी ही पांच रोचक बातें ये हैं:

राहुल गांधी कोटा
राहुल गांधी की सिफारिश पर टिकट पाने वाले नेता हैं- कुलजीत सिंह नागरा, सतकार कौर, राजविंदर सिंह लकी, शैलेंद्रजीत शैली, लखवीर सिंह लक्खा, और अमरिंदर राजा वैरिंग. एक कांग्रेसी नेता ने बताया कि चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में राहुल की सिफारिश पर पांच उम्मीदवारों को टिकट दिए गए थे लेकिन इनमें से एक ही जीत पाया. देखना होगा कि विधानसभा चुनाव में राहुल के योद्धाओं का क्या हश्र होगा.

विज्ञापन युद्ध
कांग्रेस और अकाली दल-भाजपा गठबंधन के बीच दिलचस्प विज्ञापन युद्ध देखने को मिल रहा है. कांग्रेस ने देश की प्रमुख विज्ञापन एजेंसी क्रायोंस की सेवाएं ली हैं. इस एजेंसी ने जीता और जग्गी दो चरित्र विकसित किए हैं जिनके हर रोज नए विज्ञापन चंडीगढ़ के अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं. वहीं अकाली दल-भाजपा गठबंधन भी इसके जवाब में अपनी उपलब्‍धियों को गिनाने वाले नए विज्ञापन हर रोज जारी कर रही है. यह विज्ञापन युद्ध सिर्फ अखबारों में ही नहीं बल्‍कि एफएम रेडियो और स्‍थानीय टीवी चैनलों पर भी चल रहा है. मनप्रीत बादल की पीपीपी इस विज्ञापन युद्ध में शामिल तो नहीं है लेकिन उसने इंटरनेट पर अभियान चलाने के मामले में दूसरे दलों को पीछे छोड़ दिया है. पीपीपी ने धनुष के कोलावेरी डी का पंजाबी संस्करण भी तैयार किया है.

नामांकन में जटिलता
अमरिंदर सिंह खुद कहते हैं कि नामांकन फॉर्म भरने में उनके वकील को एक हफ्ते से अधिक का वक्त लग गया. इस बार चुनाव फॉर्म में कई साल का आयकर रिटर्न मांगा जा रहा है. उम्मीदवार को यह भी बताना पड़ रहा है कि उसकी कर देनदारी कितनी है. उम्मीदवारों से संबंधित इतनी सूचनाएं मांगी जा रही हैं कि कई प्रत्याशी असुविधा महसूस कर रहे हैं और चुनाव आयोग को दबी जुबान से कोस रहे हैं.

अंधविश्वास
मनप्रीत सिंह बादल गिदड़बाह और मौड़ से चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन उन्होंने दोनों जगह नामांकन के वक्त गलत फॉर्म भरे. सूत्र बता रहे हैं कि ऐसा उन्होंने ज्योतिषी के सलाह पर किया. पंजाब की राजनीति में नए मुद्दों के जरिए रक्तसंचार करने का दावा करने वाले मनप्रीत के इस अंधविश्वासी रवैये ने कई लोगों को चौंकाने का काम किया है. अमरिंदर सिंह भी जब पर्चा भरने पहुंचे तो उन्होंने भी घड़ी की सुई से शुभ समय का मिलान करके ही दस्तखत किया. उनकी यह तसवीर पंजाब के अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई.

आयोग की सख्ती
चुनाव आयोग की तरफ से पंजाब विधानसभा चुनाव में काफी सख्ती दिखाई जा रही है. चुनाव में धांधली रोकने के लिए मतदान केंद्रों के बाहर मतदान पर्ची बांटने वाले पार्टियों के बूथ को प्रतिबंधित कर दिया गया है. चुनाव काये में लगे कर्मचारी खुद ही घर-घर पर्ची पहुंचाएंगे. आयोग जमकर वीडियोग्राफी का भी सहारा भी ले रहा है. हर विधानसभा क्षेत्र में एक आईएएस, एक आईपीएस और एक भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों को तैनात किए जाने से बड़े दलों के लिए पैसे और शराब बांटने का खेल बिगड़ रहा है.

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