‘टीम अन्ना की टिप्पणी से मैं नाराज नहीं’

जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष शरद यादव, हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि कुछ दागी सांसदों की वजह से पूरी संसद के औचित्य पर सवाल उठाना लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है

टीम अन्ना ने लोकपाल के मसले पर आप पर अपने वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया और ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ कहकर आप पर प्रहार किया. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

उनके इस बयान को लेकर मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूं. हम लोग राजनीति में हैं तो इस तरह के हमले तो होते रहते हैं. इससे कहीं ज्यादा बड़े-बड़े आरोप हम पर लोगों ने पहले भी मढ़े हैं. हां, उनकी यह बात सही नहीं है कि मैंने जो पहले कहा था उससे पीछे हट गया हूं. अभी लोकपाल आया कहां है कि पीछे हटने की बात वे कर रहे हैं.

इसके बावजूद आपने लोकसभा में टीम अन्ना पर कड़ा रुख अ‌पनाया. अगर कोई नाराजगी नहीं है तो फिर आखिर आपने ऐसा क्यों किया?
मैंने कहा कि मेरे बारे में जो टिप्पणी उन्होंने की है उस पर मेरी कोई नाराजगी नहीं है. लेकिन जिस तरह की बातें वे पूरी संसद को लेकर कर रहे हैं, मेरी आपत्‍ति उनको लेकर है. संसद तो लोकतंत्र का स्तंभ है और अगर आप संसद पर इस तरह से हमला करेंगे तो फिर कई तरह की समस्याएं खड़ी होंगी. कुछ सांसदों पर आपराधिक आरोप हैं और वे दागी हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी संसद का ही कोई औचित्य नहीं है. संसद को लेकर इस तरह का सामान्यीकरण कर देना लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है. यह बात टीम अन्ना को भी और उन दूसरे लोगों को भी समझनी चाहिए जो लगातार संसद पर हमले कर रहे हैं.

कुछ समय पहले तक तो आप, आपकी पार्टी और यहां तक की ज्यादतर विपक्षी दल टीम अन्ना का समर्थन कर रहे थे. लेकिन अब टीम अन्ना पर हमला करने को लेकर आप लोग और अन्य विपक्षी दल भी कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों?
भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई का हम समर्थन कर रहे थे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे संसद पर हमला करेंगे फिर भी हम उनका समर्थन करेंगे. अगर संसद में कुछ लोग बुरे हैं तो कुछ अच्छे लोग भी तो हैं. ऐसे में संसद के उजले पक्ष को नजरअंदाज करके सिर्फ काले पक्ष की बात करना कहां का न्याय है.

क्या उनके मुद्दों को अब भी आपका समर्थन जारी है?
बिल्कुल, भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है. वे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं. भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर आखिर किसे आपत्‍ति होगी. इस मसले पर हम संसद के अंदर और संसद के बाहर भी संघर्ष कर रहे हैं.

तो फिर लोकपाल पारित होने में देर क्यों हो रही है?
कानून बनने की अपनी एक प्रक्रिया है और यह तो अपने हिसाब से ही चलेगी. सभी को इसका सम्मान करना चाहिए. टीम अन्ना को भी थोड़ा धैर्य रखना चाहिए.

वे तो आरोप लगा रहे हैं कि सरकार लुंज-पुज लोकपाल लाने की ताक में है.
अभी आया नहीं है ना. कांग्रेस के पास तो राज्यसभा में बहुमत ही नहीं है. उन्हें तो हर विधेयक पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन चाहिए. हम लुंज-पुज लोकपाल थोड़े ना पारित होने देंगे.

टीम अन्ना आंकड़ों के आधार पर कह रही है कि संसद में बड़ी संख्या वैसे सांसदों की है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है. ये आंकड़े खुद सांसदों के हलफनामे के आधार पर तैयार किए गए हैं. ऐसे में अगर वे इस बात को उठा रहे हैं तो उसमें बुराई क्या है?
वे जिस आंकड़े को आधार बना रहे हैं उसमें एक बुनियादी खामी है. जो भी संगठन इस तरह के आंकड़े तैयार करते हैं वे आपराधिक और राजनीतिक मुकदमों को एक ही श्रेणी में रखकर अपनी रिपोर्ट जारी कर देते हैं. जबकि होना यह चाहिए कि इन दोनों श्रेणी के लिए अलग-अलग आंकड़े तैयार होने चाहिए. क्योंकि जो लोग राजनीति में हैं उन्हें तो जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष करना होता है और इस क्रम में कई मुकदमे भी दर्ज होते हैं और नेता जेल भी जाते हैं. लेकिन इन मुकदमों को भी आपराधिक मुकदमों की श्रेणी में रखकर सबको दागी बताना और पूरी संसद पर हमला करना तो न्यायसंगत नहीं है.

आप उन लोगों पर सवाल उठा रहे हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जो संसद के बाहर सांसदों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और उनके व्यवहार को अमर्यादित कह रहे हैं. लेकिन कई बार यह देखा गया कि संसद के अंदर भी सांसद ऐसा व्यवहार करते हैं जिसे मर्यादित नहीं कहा जा सकता. आप क्या कहेंगे?
कोई भी सांसद अगर अमर्यादित व्यवहार करता है तो उसे भला कोई कैसे सही ठहरा सकता है. जो भी सांसद इस तरह का व्यवहार संसद में करते हैं उनकी निंदा होती है. कई मौके ऐसे आए हैं जब सांसदों को सदन से बाहर करने का काम भी इसी संसद ने किया है. सांसदों को बर्खास्त भी इसी संसद ने किया है. मर्यादा के बाहर बोलना किसी के लिए भी ठीक नहीं है. वह चाहे सांसद हो या फिर कोई और.

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