‘जो भी देश तोड़ने की बात करेगा हम उस पर हमले करेंगे’

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर हमला करने वाले भगत सिंह क्रांति सेना के अध्यक्ष तेजिंदर पाल सिंह बग्गा हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि हमें भारतीय जनता युवा मोर्चा में वह नहीं करने दिया जा रहा था जो हम करना चाहते थे

कश्मीर पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के एक बयान से नाराज होकर आप लोगों ने उन पर हमला कर दिया. क्या एक लोकतांत्रिक व्यवस्‍था में असहमत होने पर हिंसा का सहारा लेना जायज है?
जो लोग देश तोड़ने की बात करते हैं उनके खिलाफ ऐसा करने के लिए हमें मजबूर होना पड़ा है. ये ऐसे लोग हैं जो कश्मीर को भारत से अलग करने की बात तो करते ही हैं साथ ही आतंकवादी कसाब की फांसी का विरोध भी करते हैं. ये माओवादियों का पक्ष लेते हैं. प्रशांत भूषण बार-बार भारत विरोधी बयान दे रहे थे. इन्होंने न सिर्फ वाराणसी में ऐसा बयान दिया बल्‍कि 2 अप्रैल 2011 को कश्मीर में स्वामी अग्‍निवेश के साथ प्रेस वार्ता आयोजित कर यह कहा कि वहां जो हो रहा है उसके लिए पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है.

आपको अगर लगता है कि उनके बयान देशतोड़क हैं तो आप उनके खिलाफ अदालत जा सकते थे लेकिन आपने हमला का रास्ता चुना. ऐसा क्यों?
तकरीबन तीन साल पहले खलिस्तान समर्थकों ने दिल्ली में जगह-जगह पोस्टर लगा दिए थे. उसी समय उन लोगों ने पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में रैली करने की बाकायदा घोषणा की थी. उस समय मैंने खुद गृह मंत्री पी. चिदंबरम और पुलिस के आला अधिकारियों को पत्र लिखा लेकिन इन लोगों ने कुछ नहीं किया. सैयद अली शाह गिलानी और अरुंधती रॉय के गैरजिम्मेदाराना बयानों के खिलाफ हम संबंधित अधिकारियों से लगातार शिकायत करते रहे लेकिन अब तक किसी मामले में इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जब सरकार कुछ कर नहीं रही तो हम हिंसा का राह चुनने को मजबूर हैं.

आतंकवादी, माओवादी और अन्य विद्रोही भी हिंसा कर रहे हैं और आप भी. फिर आपमें और उनमें फर्क क्या रहा?
उनकी हिंसा देश को तोड़ने के लिए है और हमारी हिंसा देश को जोड़ने के लिए.

आपने अपने संगठन का नाम भगत सिंह के नाम पर रखा है लेकिन आपको नहीं लगता कि आपके इन कदमों से उनका नाम बदनाम हो रहा है?
नहीं, हम ऐसा नहीं मानते. हमने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए उनके रास्तों को चुना है. हमारा मकसद उन्हें बदनाम करना नहीं है.

तो फिर क्या निहत्‍थे लोगों पर हमला करके आप सस्ती लोकप्रियता पाना चाहते हैं?
देखिए, कोई भी यह नहीं चाहता उसके खिलाफ नए-नए एफआईआर दर्ज हों. हम भी ऐसा नहीं चाहते. पहले भी हमने अरुंधती रॉय, सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक को इसी अंदाज में चेतावनी दी. उनके मुकदमें अब भी हमारे ऊपर चल रहे हैं. हालांकि, हमें इस बात की संतुष्‍टि है कि हमारी गतिविधियों का असर इन पर पड़ा है और इनके गैरजिम्मेदाराना बयान कम हुए हैं. आगे भी जो देश तोड़ने वाला बयान देगा हम उस पर हमला करेंगे. गिलानी और मलिक ऐसे लोग हैं जो अपने बच्चों को तो अच्छी शिक्षा के लिए विदेश भेजते हैं लेकिन कश्मीर के नौजवानों के हाथों में पत्‍थर पकड़ाकर उन्हें विद्रोही बनाते हैं. इनके समझ में हिंसा की भाषा ही आती है.

टीवी फुटेज से तो ऐसा लग रहा है कि लोग प्रशांत भूषण को बचाने नहीं आते तो आपके सहयोगी उन्हें मार ही डालते.
नहीं, नहीं, हमारा मकसद उन्हें सबक देना था. यही वजह है कि हमने उन पर हमला करने के बाद वहां अपने संगठन के पर्चे छोड़े.

आपके संगठन ने अन्ना हजारे के समर्थन में तिहाड़ जेल के बाहर प्रदर्शन किया था. अब आपने उनकी ही टीम के सदस्य पर हमला कर दिया. यह विरोधाभास क्यों?
अन्ना हजारे का समर्थन मुद्दे पर है. भ्रष्टाचार के मसले पर हम अब भी उनके साथ हैं. लेकिन अगर वे कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करेंगे तो हम उनका साथ नहीं देंगे.

क्या आपके संगठन को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थन हासिल है?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. हमें किसी राजनीतिक दल से कोई सहयोग नहीं मिल रहा.

लेकिन आप तो भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकारिणी में रहे हैं.
हां, यह पुरानी बात है. तकरीबन तीन साल पहले ही मैंने युवा मोर्चा छोड़ दिया था. मैं जिस तरह का काम अभी कर रहा हूं इस तरह का काम करने की अनुमति मुझे वहां नहीं मिली इसलिए मुझे अलग राह पकड़नी पड़ी और मैंने कुछ साथियों के साथ मिलकर भगत सिंह क्रांति सेना की शुरुआत की.

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