‘आंतरिक मतभेद का चुनावी तैयारियों से कोई लेना-देना नहीं’

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि आपसी बातचीत से पार्टी की आंतरिक समस्याओं को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. वे कहते हैं, ‘भारतीय जनता पार्टी कोई तानाशाही पार्टी तो है नहीं. और न ही यहां किसी एक परिवार के इशारे पर सब कुछ होता है. भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है. इसलिए कई मुद्दों पर पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद कभी-कभार दिख जाता है. लेकिन ये मतभेद ऐसे नहीं होते जिन्हें सुलझाया नहीं जा सकता. आप देखिएगा, पार्टी के नेता आपसी बातचीत के जरिए जल्द ही पार्टी की आंतरिक समस्याओं को सुलझा लेंगे.’

पिछले कुछ महीनों में भाजपा में आंतरिक असंतोष के कई मामले सामने आए हैं. आखिर इसकी वजह क्या है?
भारतीय जनता पार्टी कोई तानाशाही पार्टी तो है नहीं. और न ही यहां किसी एक परिवार के इशारे पर सब कुछ होता है. भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है. इसलिए कई मुद्दों पर पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद कभी-कभार दिख जाता है. लेकिन ये मतभेद ऐसे नहीं होते जिन्हें सुलझाया नहीं जा सकता. आप देखिएगा, पार्टी के नेता आपसी बातचीत के जरिए जल्द ही पार्टी की आंतरिक समस्याओं को सुलझा लेंगे.

हाल में भाजपा में जो मतभेद दिखे हैं वे मुद्दों पर नहीं हैं बल्‍कि एक तरह की वर्चस्व की लड़ाई दिख रही है. कर्नाटक में बीएस येदियुरप्‍पा बागी बने बैठे हैं जो राजस्‍थान में वसुंधरा राजे सिंधिया. क्या आपको इस वर्चस्व की लड़ाई का कहीं कोई अंत दिखता है?
यह बात गलत है कि पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. एक लोकतांत्रिक संगठन में असहमति की जगह होती है और भाजपा में वही दिख रहा है. अगर किसी नेता को कोई बात बुरी लगती है तो उसे भाजपा में अपनी पूरी बात रखने की पूरी आजादी है.

लेकिन भाजपा का झगड़ा पार्टी मंच तक सीमित न रहकर सार्वजनिक हो गया है. ऐसा क्यों?
इन मामलों को जितना बड़ा बताया जा रहा है उतनी बड़ी ये नहीं हैं. जो भी थोड़ी-बहुत दिक्कतें हैं उसे पार्टी जल्द ही सुलझा लेगी.

संजय जोशी को साल भर पहले भाजपा ने बुलाया और उन्हें उत्तर प्रदेश का काम सौंपा. लेकिन आखिर क्या वजह है कि नरेंद्र मोदी के दबाव में पार्टी ने ऐसी परिस्‍थिति पैदा कर दी कि उन्हें कार्यकारिणी से इस्तीफा देना पड़ा?
इस मामले में पार्टी को अधिक टिप्पणी नहीं करनी है. लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि पार्टी के सारे आंतरिक मतभेद जल्द ही सुलझ जाएंगे.

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की कमजोरियों को फायदा उठाने के बजाए भाजपा आंतरिक विवादों में ही उलझकर रह गई है?
ऐसा नहीं है. हम लगातार संप्रग सरकार की बुराइयों को उजागर कर रहे हैं. हम लगातार लोगों को यह बता रहे हैं कि यह सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है और बेलगाम बढ़ती महंगाई के लिए भी मनमोहन सिंह की सरकार जिम्मेदार है. आप आने वाले चुनावों में देखिएगा कि किस तरह से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का सूपड़ा साफ होता है. इसका सबसे अधिक फायदा भाजपा को मिलेगा. जो भी आंतरिक मतभेद की बातें आ रही हैं उनका चुनावी तैयारियों से कोई लेना-देना नहीं है.

क्या आप ऐसा नहीं मानते कि पार्टी के आंतरिक झगड़ों की वजह से आम लोगों के बीच भाजपा की साख घटी है?
लोग महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान हैं और बदलाव चाहते हैं. आपसी मतभेद किस घर में नहीं होता. हर परिवार में किसी न किसी मुद्दे पर छोटे-मोटे मतभेद होते रहते हैं. फिर भाजपा तो इतनी बड़ी पार्टी है. लोग इस बात को अच्छी तरह समझते हैं. मुझे नहीं लगता कि आम लोगों के बीच भाजपा की साख घट रही है. आने वाले दिनों में जो चुनाव होंगे उनके नतीजे मेरी बात की पुष्‍टि करेंगे.

क्या आंतरिक कलह से भाजपा की चुनावी तैयारियां नहीं प्रभावित हो रही हैं?
मैं बार-बार कह रहा हूं कि जो भी छोटे-मोटे मतभेद हैं उन्हें सुलझा लिया जाएगा. राज्यों में जहां भी चुनाव होंगे या फिर जब लोकसभा चुनाव होंगे तो उनमें भाजपा पूरी तरह से एकजुट होकर मैदान में उतरेगी. विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने का काम चल रहा है. अगले कुछ दिनों में यह काम पूरा हो जाएगा. हमारी चुनावी तैयारियां अपनी गति से आगे बढ़ रही हैं.

तो क्या भाजपा चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार है?
हां, हम किसी भी चुनाव के लिए तैयार हैं. इस साल कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. उनके लिए हमारी तैयारी चल रही है. लोकसभा चुनाव कभी भी होने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता. इसलिए भाजपा लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर काम कर रही है.

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