फिर हाशिये पर जमीन और किसान
सबसे ज्यादा सांसदों को दिल्ली भेजने वाले इस प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई जमीन वापस पाने की ताक में लगी कांग्रेस ने राहुल गांधी की अगुवाई में एक बार फिर यहां जमीन और किसान को मुद्दा बनाने की कोशिश की. शायद राहुल की जेहन में ममता की कामयाबी रही हो. बुंदेलखंड के बदहाल किसानों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करवाने से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों से अधिग्रहण के नाम पर जबरन छीनी जा रही जमीन के खिलाफ हल्ला बोलने का काम कांग्रेस ने किया. जमीन और किसान का मुद्दा कई बार सूबे में अहम दिखता है लेकिन चुनाव आते ही ये मुद्दे पीछे छूटते दिखते हैं और जात-जमात की राजनीति हावी हो जाती है.
पंजाब चुनाव की पांच रोचक बातें
इस बार का पंजाब चुनाव कई मामलों में प्रदेश में अब तक हुए चुनावों से अलग है. पहली बार यहां की राजनीति में तीसरा कोण दिख रहा है. वहीं प्रमुख नेताओं के कोटे से टिकट पाने वालों में राहुल गांधी के कोटे से टिकट पाने वाले भी शामिल हो गए हैं. पहली बार बड़े रोचक अंदाज में राज्य के दो प्रमुख दलों में विज्ञापन युद्ध दिख रहा है. इसके लिए नामी कंपनियों का सहारा लिया गया है. वहीं चुनाव आयोग की कड़ाई कई नेताओं के सियासी स्वाद को कड़वा बना रही है. अंधविश्वास की छाया से भी इस बार का चुनाव बचा नहीं रह सका है. ऐसी ही पांच रोचक बातें ये हैं:
‘हम सियासत करते हैं सौदा नहीं’
पंजाब की बिगड़ती माली हालत के मसले पर राज्य की शिरोमणी अकाली दल और भाजपा की गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने के बाद अपना नया दल पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाकर राज्य विधानसभा चुनावों को त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील करने वाले मनप्रीत सिंह बादल से हिमांशु शेखर की बातचीत के खास अंशः पूरी दुनिया में बदलाव का माहौल है. अरब देशों से लेकर अमेरिका तक आंदोलन चल रहे हैं. भारत में भी अन्ना हजारे का आंदोलन काफी बड़ा हुआ. तो जब हर ओर बदलाव का माहौल है तो पंजाब भी इससे अलग नहीं है. मैं राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कई महीने से जाकर लोगों से मिल रहा हूं. सूबे के लोगों की आंखों में वही जज्बा दिख रहा है जो 1947 में यहां के बुजुर्गों की आंखों में था. उस वक्त देश को बनाने का जज्बा था और इस बार राज्य को बचाने का जज्बा है. इसलिए मैं कह सकता हूं कि पंजाब के इस विधानसभा चुनाव को बदलावों के लिए याद किया जाएगा.
पंजाब में कांग्रेस की राह हुई बड़ी मुश्किल
दो महीने पहले तक यह लग रहा था कि कांग्रेस आसानी से एक बार फिर प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो जाएगी. लेकिन अब ये स्थितियां नहीं है. क्लीन स्विप की संभावना के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस के लिए अब अपने बूते बहुमत पाना भी मुश्किल होता जा रहा है. पंजाब की राजनीति को जानने-समझने वाले लोग और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों का मानना है कि उम्मीदवारों के चयन में कांग्रेस ने जो गलतियां की हैं उससे क्लीन स्विप की दावेदर इस पार्टी ने पंजाब चुनाव को बराबरी की टक्कर में तब्दील कर दिया है.
महंगाईः सरकार और सच्चाई
मंडी और संगठित व असंगठित क्षेत्र की दुकानों के बीच भाव का अंतर महंगाई से संबंधित कई परतों को खोलता है. पहली बात तो यह समझ में आती है कि खास तौर पर खुदरा बाजार की कीमतों पर निगरानी रखने का कोई तंत्र नहीं है और इसका फायदा खुदरा कारोबारी उठा रहे हैं. सरकार भी यही कह रही है. लेकिन सरकार जो कह रही है वह पूरा सच नहीं है. सरकार यह नहीं बता रही कि इस तरह से ग्राहकों पर शोषण करने के मामले में संगठित क्षेत्र के खुदरा दुकान भी पीछे नहीं हैं. संगठित क्षेत्र के खुदरा दुकानों ने शुरुआती दिनों में पारंपरिक दुकानों की तुलना में कम कीमत पर भले ही फल और सब्जियों की बिक्री की हो लेकिन अब ये बराबर और कुछ मामलों में तो अधिक कीमतें भी वसूल रही हैं.
‘इस तरह से तो लोकतंत्र में गरिमा ही नहीं बचेगी’
कांग्रेस प्रवक्ता राशीद अल्वी, हिमांशु शेखर को बता रहे हैं कि आहलूवालिया को इस बात का अहसास नहीं है कि उन्होंने क्या कर दिया है. वे कहते हैं, ‘आहलूवालिया ने लीकिंग से इनकार करते हुए मुझसे नंबर मांगा लेकिन मैंने नंबर देने से मना कर दिया. बैठक से बाहर निकलते वक्त दरवाजे पर ही मैंने दोबारा उस पत्रकार को फोन लगाकर पूरी बातचीत वहां मौजूद पत्रकारों को सुनाने की कोशिश की. इसी बीच आहलूवालिया वहां आ गए और उन्होंने मुझे जोर से धक्का दे दिया और मेरा फोन मेरे हाथ से छीनना चाहा. इसमें मेरा फोन नीचे गिर गया और मेरा चश्मा भी निकलकर जमीन पर गिर गया.’
‘Problem with the BCCI is that its dealings are opaque’
Ajay Maken’s pet project, the Sports Bill, was aimed at ushering transparency and accountability in the functioning of sports federations. However, the Cabinet rejected it in August and asked the sports minister to rework it. Armed with a new Bill, he is ready to try his luck again. But the BCCI is still unhappy. And it can influence the Cabinet. Why is the Bill so important? Has it been diluted to please a few? In a candid chat with Himanshu Shekhar and Janani Ganesan, Maken explains the changes to the Bill that could have far-reaching impact.
‘यह विधेयक खेलों की तसवीर बदल देगा’
देश के खेल संघों पर लंबे समय तक काबिज रहकर वहां जमींदारी चलाना कई नेताओं का शौक बन गया है. इसका नतीजा यह हो रहा है कि तकरीबन सवा अरब आबादी वाले देश का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में अपेक्षा का अनुरुप नहीं होता. लंबे समय से खेल संघों में व्याप्त अराजकता को दूर करने की मांग उठती रही है. देश में खेलों की दशा और दिशा बदलने के मकसद से नया कानून लाने की कोशिश कर रहे केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन से हिमांशु शेखर और जननी गणेशन की बातचीत के खास अंशः